Uttar Pradesh

‘टैरिफ वार से कुछ नहीं बिगड़ेगा…भारत ही करेगा नेतृत्व’, लखनऊ में बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत, कैसे मिटेगा जात-पात? बताया तरीका

Last Updated:February 18, 2026, 23:00 ISTलखनऊ के महानगर में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में संघ प्रमुख ने कहा कि जाति, भाषा की पहचान जरूरी नहीं. हम सब हिंदू हैं, यह भाव रखना होगा. संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती है. जिस दिन से इसे महत्त्व नहीं मिलेगा, उस दिन जाति पर राजनीति करने वाले नेता भी बदल जाएंगे. मोहन भागवत ने कहा कि दूर-दूर रहने वाले परिवारों को अपने बच्चे नाते रिश्तेदारों, संबंधियों से मिलाते रहना चाहिए. साल में एक बार कुल परंपरा के लिए एकत्रित होना चाहिए. संयुक्त परिवार में संस्कारों का वास होता है. भारत एक दिन ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करेगा. टैरिफ वार से हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा.लखनऊ. “हिन्दू धर्म ही सच्चा मानव धर्म है. दुनिया मे पंथ निरपेक्षता वाला कोई समाज है तो वह हिंदू समाज है. संघ का काम देश के लिए है. अनेक जाति, पंथ संप्रदाय बताने से अच्छा है कि हम सब अपनी पहचान हिंदू माने. सामाजिक समरसता समाज मे एकता का आधार हैं.” ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को लखनऊ के महानगर में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में कहीं. उन्होंने कहा कि जाति, भाषा की पहचान महत्त्वपूर्ण नहीं हैं. हम सब हिंदू हैं यह भाव रखना होगा. जाति नाम की व्यवस्था धीरे-धीरे जा रही है. तरुण पीढ़ी के आचरण में यह दिख रहा है. संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती है. सब हिंदू सहोदर हैं, इस भाव से काम करते हैं. समाज से जाति को मिटाने के लिए जाति को भुलाना होगा. समाज में जिस दिन जाति-पाति को महत्त्व नहीं मिलेगा, उस दिन जाति पर राजनीति करने वाले नेता भी बदल जाएंगे.

बच्चों को पहले घर में दें धर्म की शिक्षासंघ प्रमुख ने कहा कि दूर-दूर रहने वाले परिवार भावनात्मक रूप से जुड़े रह सकते हैं. हमें अपने बच्चों को नाते रिश्तेदारों, संबंधियों से मिलाते रहना चाहिए. परिवारों को वर्ष मे एक बार कुल परंपरा परिवार के संस्कार के निर्वहन के लिए एकत्रित होना चाहिए. इससे परिवारों में पीढ़ियों का जुड़ाव बना रहता है. एक अच्छे परिवार से अच्छे समाज का निर्माण होता है. आधुनिकता हमारी रगों में है, लेकिन हम पश्चिमीकरण के विरोधी हैं. हम अपने बच्चों को पहले घर मे ही धर्म की शिक्षा दें. धन का प्रदर्शन करने की परंपरा हमारी नहीं रही है. संयुक्त परिवार में संस्कारों का वास होता है.

भक्तों के हाथ में होना चाहिए मंदिरों का नियंत्रणमंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के सवाल पर सरसंघचालक ने कहा कि हम भी यह चाहते हैं कि मंदिरों का नियंत्रण भक्तों के हाथों में हो. धर्माचार्य और सज्जन लोग मिलकर मंदिरों का संचालन करें, लेकिन इसके लिए हमें तैयारी करनी होगी. विश्व हिंदू परिषद इस दिशा में काम कर रहा है. मंदिरों का पैसा राष्ट्रहित व हिंदू कल्याण में लगना चाहिए. मोहन भागवत ने कहा कि संघ व्यक्ति का निर्माण करता है. संघ की कार्यपद्धति में देने की बात है, लेने की नहीं. इसलिए हमारे समर्पित कार्यकर्ताओं मे निराशा नहीं आती. अपने प्रयासों से अनेक गांवों को विकसित करने का काम संघ ने हाथ में लिया है. देश में पांच हजार गांवों को संघ ने विकास के लिए चयनित किया है, जिसमें से 333 गांव अच्छे बन गए हैं. ऐसे गांवों में जहां कुछ नही था, वहां ग्रामवासियों ने 12वीं तक विद्यालय बना दिया. गांव में कोई मुकदमा नहीं हैं. भूमिहीन किसानों को भूमि मिली है. गांव में ही रोजगार सृजित किया है. इससे गांव के किसानों की उन्नति हुई है.

हम किसी देश से नहीं दबेंगेएक सवाल के जवाब में सरसंघचालक ने कहा कि भारत एक दिन ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करेगा. टैरिफ वार से हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा. हम किसी देश से नहीं दबेंगे, खड़े रहेंगे. कुछ दिन बाद सबकुछ सामान्य हो जाएगा. भारत की अर्थव्यवस्था पूंजीपतियों और बैंको में हाथों में नहीं, हमारे घरों में है. भारत के पास इतना सामर्थ्य है कि वह दबाव सहन करके भी आगे बढ़ सकता हैं. संघ प्रमुख ने सज्जन शक्ति से आह्वान किया कि उन्हें किसी न किसी समाज परिवर्तन के प्रकल्प से जुड़कर काम करना चाहिए. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जानने के लिए संघ की शाखा में आएं और संघ को जानें. संघ की शाखा में आना संभव न हो तो संघ से जुड़े कार्यक्रमों में आएं. अगर यह भी संभव नहीं हो सकता है, तो वे किसी न किसी सामाजिक गतिविधि से जुड़ें.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Lucknow,Uttar PradeshFirst Published :February 18, 2026, 23:00 IST

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