Uttar Pradesh

सरकारी अस्पताल में जन्मे बच्चे को मिला ‘हरा खजाना’, जानिए इस अनोखी स्कीम की पूरी कहानी

Last Updated:July 10, 2025, 18:43 ISTवन महोत्सव के दौरान पीलीभीत में जन्मे नवजातों को ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट और सागौन का पौधा दिया जा रहा है. 18 साल बाद पेड़ से मिलने वाला लाभ बच्चों को मिलेगा। पर्यावरण प्रेमियों ने योजना पर सवाल भी उठाए हैं.पीलीभीत- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और लोगों को प्रकृति से भावनात्मक रूप से जोड़ने के उद्देश्य से वन एवं वन्यजीव प्रभाग, पीलीभीत ने एक नई और प्रेरणादायक पहल की है. इसके तहत 1 जुलाई से 7 जुलाई (वन महोत्सव सप्ताह) के बीच सरकारी अस्पतालों में जन्मे बच्चों को ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ के साथ एक सागौन का पौधा उनकी माताओं को भेंट स्वरूप दिया जा रहा है.

प्रदेशभर में पौधारोपण का महाभियानउत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर राज्यभर में इस सप्ताह को पौधारोपण महाभियान के रूप में मनाया जा रहा है. पीलीभीत जिले को 35 लाख पौधों का लक्ष्य दिया गया है. इसी कड़ी में यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक चेतना को भी जाग्रत कर रही है.

वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त प्रयास
डीएफओ भरत कुमार डीके के अनुसार, इस योजना को स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लागू किया गया है. वन विभाग, अस्पतालों से 1 से 7 जुलाई के बीच जन्मे नवजातों की जानकारी लेकर, संबंधित परिवारों को पौधे और ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट सौंप रहा है. साथ ही, अभिभावकों को यह भी समझाया जा रहा है कि वे पौधे की देखभाल बच्चे की तरह ही करें.

18 वर्ष बाद मिल सकता है आर्थिक लाभयोजना का सबसे दिलचस्प पक्ष यह है कि जब बच्चा 18 वर्ष का होगा, तब तक सागौन का पौधा एक परिपक्व वृक्ष बन जाएगा. ऐसी स्थिति में परिवार को उस वृक्ष से आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है. यही कारण है कि इस योजना को “ग्रीन गोल्ड कार्ड” नाम दिया गया है.

पर्यावरण प्रेमियों ने उठाए सवाल
हालांकि योजना सराहनीय है, लेकिन कुछ पर्यावरण प्रेमियों ने इस पर सवाल उठाए हैं. उनका मानना है कि यदि शुरुआत में ही पौधे को काटने के आर्थिक लाभ की योजना बनाई जा रही है, तो यह पर्यावरण संरक्षण की भावना के विपरीत हो सकता है. उनका तर्क है कि वृक्षों को केवल संसाधन के रूप में नहीं बल्कि जीवित साथी और पर्यावरण की ढाल के रूप में देखा जाना चाहिए.

संवेदनशील सोच या व्यावसायिक नजरिया?यह पहल निश्चित ही एक नवाचारपूर्ण सोच को दर्शाती है, जहां पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक और आर्थिक जुड़ाव के साथ जोड़ा गया है. लेकिन इसके क्रियान्वयन, लंबी अवधि की निगरानी, और वास्तविक लाभ की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल भी उभर रहे हैं.Location :Pilibhit,Uttar Pradeshhomeuttar-pradeshसरकारी अस्पताल में जन्मे बच्चे को मिला ‘हरा खजाना’, जानिए इस अनोखी स्कीम की पू

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