Sore throat: पूरे भारत में एक जैसा मौसम नहीं होता है. जहां उत्तर भारत में इस वक्त कड़ाके की ठंड पड़ रही है वहीं दक्षिण भारत में आमतौर पर अधिक ट्रॉपिकल होता है और तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं देखा जाता है. हालांकि आजकल यह स्थिति बदल रही है. जलवायु परिवर्तन दुनिया को जकड़ रहा है और इससे हमारा देश की अछूता नहीं है. एक तरफ, उत्तरी भागों में ठंड, कोहरा और प्रदूषण ज्यादा हो रहा है वहीं दक्षिणी भागों में ठंडी रातों और तुलनात्मक रूप से गर्म दिनों के साथ तापमान में भारी बदलाव हो रहा है. इस असंतुलित जलवायु ने आबादी में कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दिया है.
बार-बार होने वाली सर्दी, खांसी और बलगम ऐसी कुछ समस्याएं हैं जो रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभावित करती हैं. ये समस्याएं छोटे बच्चों और स्कूल जाने वाले बच्चों में अधिक आम हैं क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. लक्षणों में नाक बंद होना, नाक बहना, गले में खराश, आवाज में कर्कशता, घरघराहट, सांस लेते समय रोंची की आवाज, छाती में बलगम और कभी-कभी सिरदर्द शामिल हो सकते हैं. इससे बचने के लिए सामान्य राहत मंत्र गर्म रहना और गर्म शक्ति वाली दवाएं लेना है. सर्दी और सांस से जुड़ी समस्याओं को प्रभावी ढंग से घर पर प्रबंधित किया जा सकता है, लेकिन यदि लक्षण गंभीर हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.
आप इन आयुर्वेदिक नुस्खों को भी अपना सकते हैं
गले में दर्द और आवाज खराब होने पर गर्म पानी में नमक, हल्दी या त्रिफला चूर्ण मिलाकर बार-बार गरारे करें. इससे आपको लाभ मिलेगा.
छह महीने से कम उम्र के बच्चों को दवा की सलाह नहीं दी जाती है, लेकिन मां को दवा देकर स्तन के दूध के माध्यम से दवाएं दी जा सकती हैं, जो ज्यादातर मामलों में समान लक्षणों से पीड़ित हो सकती हैं.
वच/एकोरस कैलमस एक एक प्रभावी जड़ी बूटी है जो छोटे बच्चों में इम्यूनिटी, पाचन और दिमाग तेज करने में मदद करता है. इस सूखे हर्ब की थोड़ी मात्रा को खुरदरी सतह पर रगड़ा जाता है और पेस्ट को थोड़े से घी के साथ दिया जा सकता है.
सर्दी और बलगम के मामलों में सोंठ भी एक बहुत प्रभावी जड़ी बूटी है. इसे मसाला चाय में एक इंग्रेडिएंट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, पीने के पानी के साथ उबाला जा सकता है या इस कम मात्रा में चबाया जा सकता है.
बच्चों और एडल्ट में सर्दी, बुखार और सीने में जमाव के लिए एक और बहुत महत्वपूर्ण पौधा है पत्थर चूर (मैक्सिकन पुदीना). इस पौधे की पत्तियों को हल्का गर्म करके उनका रस निकालने के लिए कुचला जाता है. इस जूस को शहद के साथ भी दिया जा सकता है. पत्तियों का उपयोग पीने के पानी में भी किया जा सकता है.
इन लक्षणों के लिए तुलसी भी एक बहुत ही उपयोगी उपाय है. तुलसी के साथ उबाला गया पानी बुखार, सर्दी और जमाव को कम करता है और इम्यूनिटी में सुधार करता है. तुलसी के पत्तों को सीधे धोकर भी खाया जा सकता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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