Uttar Pradesh

सोनभद्र के आदिवासियों की इस पूजा से हर कोई होता है हैरान, शरीर से पार कर देते हैं लोहे की राड

Last Updated:April 06, 2025, 20:22 ISTSonbhadra Tribals Navratri 2025: सोनभद्र के आदिवासी बहुत खास तरीके से नवरात्रि मनाते हैं. वे अपनी जीभ में लोहे की रॉड पार कर देते हैं.X

आदिवासियों की कही जाती हैं कुल देवी, पूजा की है अलग परंपरासोनभद्र: नवरात्रि के समय देश भर के मंदिरों में पूजा-पाठ किया जाता है. सभी राज्यों और लोगों के पूजा-पाठ के अपने-अपने तरीके और मान्यताएं हैं. आज हम आपको उत्तर प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले के नाम से पहचाने जाने वाले सोनभद्र जिले की कुछ खास परंपराओं के बारे में बताने जा रहे हैं. सोनभद्र को यूपी का सर्वाधिक आदिवासी आबादी वाला जिला कहा जाता है. यहां के आदिवासी अलग ढंग से नवरात्रि मनाते हैं. इनका तरीका थोड़ा अलग होता है. नवरात्रि के बाद जब राम नवमी से जवारे का विसर्जन होता है उस समय आदिवासी समुदाय से जुड़े लोग खास तरीके से देवी को प्रसन्न करते हैं.

आदिवासी लोगों की परंपरा में नवरात्रि शुरू होते ही जवारे बो दिए जाते हैं. इन जवारों यानी जौ को नौ दिनों तक पूजन के बाद राम नवमी से अगली तिथियों तक आस-पास के देवी मंदिरों में विसर्जित किया जाता है. इसमें आदिवासी लोग अपने जीभ पर लोहे के एक पतले रॉड को आर-पार कर लेते हैं. उनके शरीर के खून भी नहीं निकलता. इसी हालत में लोग कई किमी की दूर पैदल चलकर मां के धाम पहुंचते हैं. इतना ही नहीं कई तो मिट्टी के एक बड़े बर्तन में ख़प्पड़ लेकर रास्ते भर नाचते हुए मां के दरबार तक जाते हैं. कई लोग मजबूत लोहे के चैन से अपनी पीठ पर वार करते हुए मां को प्रसन्न करते हैं. यह दृश्य खास कर सोनभद्र के सीमावर्ती मंदिर कुंडवासिनी धाम में या फिर जुगैल के जिरही देवी मंदिर पर ज्यादा देखने को मिलता है.

इस बारे में यहां की परम्पराओं के जानकार ज्ञानेंद्र पाठक ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि यह माता रानी की कृपा ही होती है जो लोगों को इतनी शक्ति आ जाती है. साधारण व्यक्ति कभी इसे बिना शक्ति के नहीं कर सकता. यह हजारों वर्ष पुरानी यहां की परंपरा है जो देश ही नहीं विदेशों तक विख्यात है. आदिवासियों की इस पूजा पद्धति को देखकर हर कोई अचंभित रह जाता है कि किस प्रकार से वह एक लोहे को अपनी जीभ के आर-पार करते हैं. इस दौरान आदिवासी लोग किसी भी तरह की मेडिकल सुविधा की मदद भी नहीं लेते. यह अपने आप में अचंभित करने वाली बात है. लोहे की सरिया या जिसे सांग भी कहते हैं उसे अपने शरीर में पार करने के बाद आदिवासियों की सेहत या शरीर पर इसका कोई नुकसान भी नहीं होता.
Location :Sonbhadra,Uttar PradeshFirst Published :April 06, 2025, 20:22 ISThomeuttar-pradeshसोनभद्र के आदिवासियों की ये पूजा है खतरनाक, शरीर से पार कर देते हैं राड

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