Sleep Paralysis: सोते समय सपना देखना आम बात है. कई बार हम अच्छे सपने देखते हैं, तो कभी बहुत बरे. सपनों के आधार पर हमारी शरीरिक गतिविधियां भी होती हैं. कुछ लोगों की सपने में बोलने की आदत भी होती है. वैसे तो यह सपने वास्तव में निद्रावस्था में मस्तिष्क में होने वाली क्रियाओं का परिणाम होते हैं. वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि निद्रावस्था में हर व्यक्ति को रोजाना दो-तीन बार सपने आते हैं. लेकिन सपने देखते समय एक ऐसी स्थिति भी आती है, जब इंसान का शरीर कुछ देर के लिए पैरालाइज यानी लकवा ग्रस्त हो जाता है. इस स्थिति में व्यक्ति चाहते हुए भी अपने शरीर के अंगों को नहीं मूल कर पाता है. लेकिन सपना खत्म होते ही वह बिल्कुल सामान्य हो जाता है.
आपको बता दें सपनों के पीछे ग्रह और राशियां भी जिम्मेदार होती हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि यह स्थिति अधिकतर डरावने सपने देखने के दौरान होती है. डरावने सपने भी तभी आते हैं, जब हमारी सोच नकारात्मकता से भरी हो और हम डरे हुए माहौल में जीना शुरू कर दें. ये सबसे ज्यादा खतरनाक तब होता है जब स्लीप पैरालिसिस में हेलुसिनेशन और एंजाइटी एक साथ प्रभावी होता है. स्लीप पैरालिसिस की दिक्कत आमतौर पर युवाओं में देखी जाती है. इसमें व्यक्ति पूरी तरह से मरने जैसा हो जाता है. तो चलिए जानेंगे स्लीप पैरालिसिस के बारे में सबकुछ..
किस स्थिति में होता है स्लीप पैरालिसिस आपको बता दें, स्लीप पैरालिसिस की समस्या एक दिमागी बीमारी होती है. जब कोई इंसान मेंटली प्रेशर में होता है, या फिर किसी घोर परेशानी से टेंशन लेने लगता है, तभी स्लीप पैरालिसिस की बीमारी होती है. हालांकि ये बीमारी तीन स्थितियों में उत्पन्न होती है. पहले जब व्यक्ति सोने की कोशिश करता है, तब नींद के शुरुआती चरण में ही स्लीप पैरालिसिस की दिक्कत होती है. दूसरी स्थिति जब व्यक्ति गहरी नींद में होता है और वह अचानक से जाग जाता है. तीसरी स्थिति में तब आती है, जब आदमी अधिक काम करने से थक जाता है और अचानक उसे झपकी आ जाती है. ये स्लीप पैरालिसिस की तीन स्टेज हैं.
स्लीप पैरालिसिस के क्या हो सकते हैं लक्षण-
1. डरावने सपने देखते समय बोलने और शरीर को हिलाने में असमर्थ होना2. नकारात्मक शक्ति को महसूस होना3. किसी अंजान व्यक्ति के कमरे में होने का एहसास होना4. छाती और गले में दबाव और घुटन महसूस करना5. अपने मन मस्तिष्क में किसी काले साए को देखना
ये हैं उपाय-स्लीप पैरालिसिस से बचने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करें. पीठ के बल ना सोएं. अपने स्लीपिंग पेटर्न को बेहतर बनाएं. रोज पर्याप्त नींद लें और एक ही समय पर सोने की कोशिश करें. सोने से पहले खुद को पूरी तरह से रीलैक्स करें. अगर आप को ये समस्या किसी मेडिसिन को लेने के बाद हो रही है तो आप अपने डॉक्टर से जरूर बात करें.
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