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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, तमिलनाडु और केरल से मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा की जांच करने का निर्देश दिया

मुल्लापेरियार बांध: केरल और तमिलनाडु के बीच विवाद का केंद्र

केरल के इडुक्की जिले में 1895 में बने पेरियार नदी पर स्थित मुल्लापेरियार बांध को तमिलनाडु ने एक लीज समझौते के तहत संचालित करता है। इस बांध को लेकर केरल और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है, जिसमें केरल ने इसकी उम्र और भूकंपीय संवेदनशीलता के कारण सुरक्षा चिंताओं का उल्लेख किया है, जबकि तमिलनाडु ने इसके महत्व को प्रदर्शित करते हुए कई दक्षिणी जिलों के लिए सिंचाई और पेयजल आपूर्ति का उल्लेख किया है।

केरल के निवासियों की जान-माल की सुरक्षा के लिए वरिष्ठ वकील वी गिरि ने पेटीशन में कहा कि इस बांध की उम्र के कारण लगभग 10 मिलियन लोगों के जीवन और संपत्ति को खतरा है, और उन्होंने अदालत से निर्देश देने का आग्रह किया कि एक नए बांध का निर्माण किया जाए ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

इस पीआईएल में केंद्र सरकार, तमिलनाडु और केरल सरकार, और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को प्रतिवादी के रूप में नामित किया गया है।

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