Last Updated:July 11, 2025, 13:57 ISTShiva Temples In Meerut: आज 11 जुलाई से श्रावण मास की शुरुआत हो चुकी है. हर जगह हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देने लगी है. शिव जी के मंदिरों में भक्तों का आना-जाना शुरू हो चुका है. हिंदू धर्म के अनुसार, सावन का महीना बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है और शंकर जी को समर्पित होता है. भक्त पूरे महीने भोलेनाथ की पूजा-पाठ में लीन होते हैं. सावन मास में पड़ने वाले सावन सोमवार को व्रत रखते हैं. इस बार 4 सावन सोमवार पड़ रहे हैं, 14 जुलाई, 21 जुलाई, 28 जुलाई और 4 अगस्त. आइये आपको बताते हैं मेरठ के कुछ खास और मान्यता वाले शिवालय के बारे में जहां आप दर्शन कर महादेव का आशीर्वाद पा सकते हैं. मेरठ कैंट स्थित बाबा औघड़नाथ मंदिर में भक्तों की काफी आस्था देखने को मिलती है. यह क्रांति स्थल के तौर पर भी जाना जाता है. सावन माह में बड़ी संख्या में यहां श्रद्धालु विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करते हैं. शिवरात्रि, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर देश भर से श्रद्धालु या जलाभिषेक करते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी यहां पर पूजा अर्चना कर चुकी हैं. मेरठ कैंट में ही बाबा बिलेश्वर मंदिर स्थापित है. जिसके बारे में कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी द्वारा इस मंदिर की स्थापना की गई थी. इस मंदिर के प्रति भक्तों की काफी आस्था देखने को मिलती है. मराठा शासन में इस मंदिर का जीणोद्धार हुआ था. देशभर भर श्रद्धालुओं भोले बाबा की पूजा अर्चना करने आते हैं. यहां सावन में सोमवार को बाबा का जलाभिषेक करने से भक्तों की हर समस्या का समाधान होता है. उनकी इच्छाएं पूरी होती है. मेरठ से ही 45 किलोमीटर दूर महाभारत कालीन क्षेत्र में कर्ण मंदिर भी बना हुआ है. जहां भोले बाबा मां आदि शक्ति के साथ विराजमान है. मान्यता है कि महाराज कर्ण यही पर ही प्रतिदिन पूजा अर्चना करने के बाद सवा मन सोना दान किया करते थे. मंदिर के महंत शंकर देव के अनुसार जो भी भक्त सच्चे मन से भोले बाबा पूजा अर्चना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. हस्तिनापुर में ही पांडेश्वर मंदिर भी स्थापित है. महाभारत कालीन दौर में पांचो पांडव यहां बूढ़ी गंगा में स्नान कर विधि विधान के साथ प्रतिदिन भोले बाबा की पूजा अर्चना करते थे. इस मंदिर में पांचो पांडव की मूर्ति भी स्थापित है. मंदिर के आसपास ही बड़े-बड़े मिट्टी की टीले भी देखने को मिलते हैं. बताया जाता है कि उसके आसपास ही उनके महल हुआ करते थे. यहां पूजा अर्चना करने से भक्तों की इच्छाएं पूरी होती है. मेरठ शहर की अगर बात की जाए तो सम्राट पैलेस स्थित श्री त्रिपुरासुंदर महादेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ स्फटिक मणि के रूप में विराजमान है. पौराणिक मान्यताओं की अगर बात की जाए तो स्फटिक मणि भोले बाबा और मां आदिशक्ति का ही स्वरूप माना जाता है. ऐसे में इसकी पूजा अर्चना करने के लिए भी पुरुष को जहां कांच की धोती, वहीं महिलाओं के लिए साड़ी परिधान धारण करना आवश्यक है.यहां पूजा करने से भक्तों की सभी इच्छाओं को मां आदिशक्ति और भोले बाबा पूर्ण करते हैं. मेरठ शहर में ही बाबा भोलेनाथ आदि योगी के रूप में भी विरजमान है. जब आप मेरठ के कचहरी पास जाएंगे तो वहीं नेहरू रोड पर प्राचीन भोले बाबा का मंदिर स्थापित है. जहां भोले बाबा को आदियोगी के रूप में विराजमान किया गया है. इसके नीचे कुआं बना हुआ है. जहां भोले बाबा की जटाओं से गंगा की जलधारा बहती रहती है. इस कुएं को लेकर भी बताया जाता है कि यह काफी प्राचीन है. यहां भी भोले भक्त पूजा अर्चना करते हुए दिखाई देते हैं. मेरठ से 25 किलोमीटर दूर गंगोल तीर्थ अपने आप में काफी ऐतिहासिक स्थल माना जाता है. यहीं पर ही मोक्ष धाम के रूप में एक क्षेत्र विकसित किया गया है. जहां भोले बाबा की सैकड़ो शिवलिंगों की परिक्रमा करते हुए आप मुख्य शिवलिंग के पास पहुंचेंगे. महंत शिवदास महाराज बताते हैं कि सावन में अगर यहां विधि विधान के साथ भोले बाबा की परिक्रमा करते हुए मुख्य शिवलिंग पर का जलाभिषेक किया जाए. तो भक्तों पर जितने भी प्रकार के दोष होते हैं, उन सभी का निवारण हो जाता है. बताते चले कि मेरठ नौचंदी परिसर स्थित मां चंडी देवी मंदिर में स्थापित है. यहीं पर प्राचीन भोले बाबा के शिवलिंग भी मौजूद है. जहां आपको कछुआ भी देखने को मिलेगा. मान्यता है कि यहां पर पूजा अर्चना करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. साथ ही 16 सोमवार पूजा अर्चना करने से मन चाहा वर मिलता है.homefamily-and-welfareसावन में जरूर करें मेरठ के इन शिव मंदिरों में दर्शन, भोलेनाथ की होगी कृपा
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