Last Updated:January 12, 2026, 11:11 ISTMakar Sankranti-Ekadashi: इस साल लोग बहुत कन्फ्यूजन में है मकर संक्रांति और एकादशी को लेकर. इसके पीछे की वजह है कि यह दोनों इस बार एक ही साथ पड़ रही है. अब इन दोनों को क्या एक साथ मना सकते हैं यह सवाल हर किसी के मन में चल रहा है. आइए समझते हैं विस्तार से आखिर क्या करें दोनों को मनाने के लिए. सहारनपुर: मकर संक्रांति का पर्व नजदीक है और मकर संक्रांति का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाने की तैयारी जोरों पर चल रही है. लेकिन क्या आपको पता है मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है और इस बार मकर संक्रांति वाले दिन एकादशी भी पड़ रही है, जिसको लेकर लोगों में काफी भ्रांतियां है कि वह एकादशी मनाएं या फिर मकर संक्रांति. इसको लेकर आज हम इस खबर में आपकी यह भ्रांति को दूर करेंगे कि आप किस समय एकादशी मना सकते हैं और किस समय आपको मकर संक्रांति पर्व मानना है, तो चलिए बताते हैं.
जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता हैं, तो इसे ही मकर संक्रांति कहते हैं. मान्यता है कि मकर संक्रांति से अग्नि तत्व की शुरुआत होती है. इस दिन सूर्य की उपासना की जाती है. इस समय सूर्य देव उत्तरायण भी होते हैं. जप, स्नान-दान के लिए यह अवधि सबसे विशेष होती है. साथ ही समय देवताओं के लिए भी काफी शुभ माना जाता है. इस दिन सूर्य की पूजा करने के साथ-साथ सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल यानी 2026 में दोपहर के समय सूर्य मकर राशि में गोचर कर रहे हैं. ऐसे में 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी, और उसी दिन एकादशी भी पड़ रही है तो इसलिए दिन में एकादशी और शाम के समय मकर संक्रांति का पर्व मना सकते हैं अधिक जानकारी दे रहे हैं आचार्य सोम प्रकाश शास्त्री.
किस समय करें मकर संक्रांति का भोजन और एकादशी पर कैसे करें पूजन, जानेपंडित सोमप्रकाश शास्त्री ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि वैसे तो जो मकर संक्रांति है इसका पूर्ण नाम है मकरार्क. हमारे यहां पर प्रत्येक महीने में एक मकर संक्रांति आती है और 12 महीने की 12 सक्रांतियां होती है. परंतु यह जो मकर है यह सूर्य और मकर राशि में प्रविष्ट हो जाता है. उसके उपरांत ही यह मकर संक्रांति मनाई जाती है. इस बार मकर संक्रांति को लेकर थोड़ी भ्रांतियां है. मकर संक्रांति वाले दिन लोग मूंगफली, रेवड़ी, गजक, काली दाल की खिचड़ी, वस्त्र, छाता, दान, जूते, बर्तन संकल्प लेकर अपने पितरों के नाम से मंदिर और ब्राह्मणों को दान देते हैं.
6:40 के बाद ही खा सकते हैं खिचड़ीलेकिन इस बार मकर संक्रांति एकादशी वाले दिन पड़ रही है. इसलिए मैं कहना चाहूंगा अपने सनातनी लोगों से जो भी व्यक्ति इस पर्व को मनाना चाहे वह आराम से अपनी खिचड़ी को बनाए, इस दिन खिचड़ी खाने का प्रावधान भी है. तो अपने यहां पर मीठी खिचड़ी बनाएं. मूंगफली की खिचड़ी बनाएं, सांवक के चावल की खिचड़ी बनाएं और भोग लगाकर भगवान नारायण को फिर प्रसाद ग्रहण करें. अगर आपको इस दिन खिचड़ी का सेवन करना है तो आप शाम 6:40 के बाद ही खिचड़ी खा सकते हैं क्योंकि उस समय द्वादशी लग जाएगी. इसलिए एकादशी में पूजन और द्वादशी में चावल खाने से अभय फल प्राप्त होता है.About the AuthorAbhijeet Chauhanन्यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा की पॉलिटिक्स और क्राइम खबरों में रुचि. वेब स्टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने मे…और पढ़ेंLocation :Saharanpur,Saharanpur,Uttar PradeshFirst Published :January 12, 2026, 11:11 ISThomeuttar-pradeshएक ही दिन संक्रांति और एकादशी, क्या दोनों मना सकते हैं एक साथ? जानें क्या करें

