Uttar Pradesh

आरओ टिप्स: सावधान! कहीं आपका आरओ ही तो नहीं बना रहा आपको बीमार? इन 5 संकेतों को न करें अनदेखा

कहीं आपका RO ही तो नहीं बना रहा आपको बीमार? इन 5 संकेतों को न करें इग्नोर

आजकल हमारे घरों में वाटर प्यूरीफायर (RO) का उपयोग आम बात हो गई है. यह मशीन हमें सुरक्षित पानी पीने का मौका देती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि समय बीतने के साथ यही मशीन बीमारियों का घर बन सकती है? बाहर से चमकती मशीन के अंदर सड़ चुके फिल्टर और पाइप्स आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे होते हैं. अगर आप भी सालों से एक ही प्यूरीफायर इस्तेमाल कर रहे हैं, तो रुकिए! एक्सपर्ट्स और RO मैकेनिक के अनुसार, कुछ ऐसे संकेत हैं जो बताते हैं कि अब आपकी मशीन को सर्विस की नहीं, बल्कि ‘रिटायरमेंट’ की जरूरत है.

पानी का बदला हुआ स्वाद, कम प्रेशर और बार-बार होने वाली खराबी इसके मुख्य संकेत हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, पाइपों में पनपने वाली ‘बायोफिल्म’ गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है. जानें वे 5 बड़े संकेत जो बताते हैं कि अब आपको अपना पुराना प्यूरीफायर तुरंत बदल लेना चाहिए.

पानी का बदला हुआ स्वाद सबसे पहला संकेत है कि आपकी मशीन का समय समाप्त हो गया है. यदि गिलास भरते ही पानी से मिट्टी जैसी या फिर अजीब सी गंध आए और स्वाद कड़वा लगने लगे, तो समझ लीजिए कि कार्बन फिल्टर और मेम्ब्रेन जवाब दे चुके हैं. खराब मेम्ब्रेन के कारण पानी में मौजूद क्लोरीन और अशुद्धियों को ठीक से सोखना बंद कर देते हैं, जिससे पानी साफ नहीं हो पाती, जो शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह है.

बार-बार होने वाली खराबी और कम प्रेशर एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं. यदि बार-बार सर्विस के बाद भी प्रेशर नहीं बढ़ रहा, तो यह मशीन बदलने का सही समय है. दरअसल, पानी की गंदगी मेम्ब्रेन की झिल्ली में जमा होकर प्रेशर कम कर देती है, तो पानी का प्रेशर कम हो जाता है.

पानी की शुद्धता मापने का सबसे सटीक तरीका टीडीएस (Total Dissolved Solids) लेवल है. पीने के पानी के लिए 50 से 150 के बीच का टीडीएस आदर्श माना जाता है. अगर फिल्टर बदलने के बाद भी TDS लेवल स्थिर नहीं रह रहा या बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखा रहा है, तो इसका मतलब है कि मशीन का इंटरनल सिस्टम अब पानी शुद्ध करने के लिए उपयुक्त नहीं बचा है.

अगर आपकी RO मशीन हर महीने मैकेनिक मांग रही है और रिपेयरिंग का खर्च नई मशीन की किश्त के बराबर पहुंचने लगा है, तो समझदारी नई मशीन लेने में ही है. एक अच्छी मशीन की उम्र अधिकतम 5 से 10 साल होती है, इसके बाद वह केवल बिजली और पैसा बर्बाद करती है, सेहत नहीं सुधारती.

शुद्ध पानी कांच की तरफ साफ और पारदर्शी होना चाहिए. अगर आरओ के पानी में आपको हल्का पीला, मटमैला सा पानी दिखे या फिर कुछ बारीक कण तैरते नजर आ रहे हैं, तो इससे पेट खराब हो सकता है.

अंत में, एक्सपर्ट्स के अनुसार, पुराने प्यूरीफायर के पाइप्स में समय के साथ ‘बायोफिल्म’ नाम की एक चिपचिपी परत जम जाती है. यह बैक्टीरिया के पनपने की सबसे सुरक्षित जगह है. इसे साधारण सर्विसिंग से साफ करना नामुमकिन होता है. 5 से 10 साल पुरानी मशीन में यह समस्या आम है, जिससे पानी साफ होने के बावजूद संक्रमित हो सकता है.

You Missed

authorimg
Uttar PradeshMar 9, 2026

बोला था ना, मेरे लोगों के हत्थे न चढ़ जाना.. कौन हैं स्वाति अघोरी, जिसने ली आशुतोष ब्रह्मचारी पर हमले की जिम्मेदारी

प्रयागराज में आशुतोष ब्रह्मचारी पर हमले की जिम्मेदारी लेने वाली महिला की पहचान हुई प्रयागराज में आशुतोष ब्रह्मचारी…

authorimg
Uttar PradeshMar 9, 2026

विटामिन, प्रोटीन और फाइबर का कारखाना है ये दाल, नस-नस में भर देती है खून, पाचन को बनाती है मजबूत।

लोबिया – एक पौष्टिक और सेहतमंद फली बागपत में लोबिया एक बेहद पौष्टिक और सेहतमंद फली मानी जाती…

Scroll to Top