केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को विधान सौधा में कर्नाटक राज्य वकील संघ के कार्यालयाध्यक्षों की सम्मेलन में कहा कि भारतीय न्यायपालिका अक्सर कमजोर मानी जाती है, जिसके लिए उन्होंने अतीत के घटनाक्रमों का उदाहरण दिया जो इस प्रकार की धारणाओं को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा, “हमने हाल ही में एक समूह के बारे में देखा है जिसमें सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एक साथ आए थे और गृह मंत्री के खिलाफ बोल रहे थे। न्यायपालिका के सदस्यों के बीच राजनीतिक विवाद में शामिल होने से क्या फायदा है? यह न केवल पेशेवरता की गरिमा कम करता है, बल्कि संस्था के प्रति लोगों का विश्वास भी कमजोर करता है।” उन्होंने स्पष्ट रूप से सुझाव दिया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जो अब न्यायपालिका का हिस्सा नहीं हैं, राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए।
रिजिजू ने कहा कि न्यायाधीशों की भूमिका अदालत के बाहर भी होनी चाहिए, जिसमें लोगों की जागरूकता बढ़ाने, विश्वास को मजबूत करने और न्यायपालिका की विश्वसनीयता को सभी क्षेत्रों में सुरक्षित करना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है, जिसमें पुराने काले कानूनों को हटाने और कानूनी प्रणाली को सरल बनाने के लिए काम किया गया है। उन्होंने कहा, “आईपीसी और सीआरपीसी को पहले लोगों को कठोर दंड देने के लिए डिज़ाइन किया गया था। अनावश्यक बोझ कम करने और न्याय को सुनिश्चित करने के लिए, हमने पुराने प्रावधानों को हटाया और नए कानून लागू किए जो डर पैदा करने के बजाय न्याय प्रदान करते हैं। काले शासन के दौरान नागरिकों पर नियंत्रण का पुराना तरीका को हमने एक अधिक लोग-उन्मुख मॉडल से बदल दिया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है, जिसमें पुराने काले कानूनों को हटाने और कानूनी प्रणाली को सरल बनाने के लिए काम किया गया है। उन्होंने कहा, “हमने आईपीसी और सीआरपीसी में पुराने प्रावधानों को हटाया और नए कानून लागू किए जो न्याय को सुनिश्चित करते हैं। हमने काले शासन के दौरान नागरिकों पर नियंत्रण का पुराना तरीका को बदल दिया है और एक अधिक लोग-उन्मुख मॉडल को अपनाया है।”
निष्कर्ष:
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका अक्सर कमजोर मानी जाती है, जिसके लिए उन्होंने अतीत के घटनाक्रमों का उदाहरण दिया जो इस प्रकार की धारणाओं को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए और न्यायपालिका की विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है, जिसमें पुराने काले कानूनों को हटाने और कानूनी प्रणाली को सरल बनाने के लिए काम किया गया है।