पाइल्स सर्जरी के बाद क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
हाल ही में एक लोको पायलट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह अपने अधिकारी के सामने अपने घाव दिखाकर आराम की मांग कर रहा था. यह घटना न केवल अधिकारी के अमानवीय रवैये को उजागर करती है, बल्कि यह पाइल्स सर्जरी के बाद मरीजों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसके बारे में भी एक महत्वपूर्ण सबक है।
पाइल्स सर्जरी के बाद मरीजों को कम से कम 15 दिन से एक महीने तक आराम करना चाहिए. यह देखा जाता है कि मरीज की हीलिंग कैपेसिटी कितनी है, और डॉक्टर उसकी हालत देखकर आगे इसे बढ़ाने का फैसला करते हैं। यह बीमारी में कितने तरह की सर्जरी की जाती हैं, यह जानना भी महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ पाइल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मिली-जुली कई बीमारियां होती हैं, जैसे बवासीर, फिशर, फिस्टुला यानि भगंदर, रैक्टल प्रोलैप्स आदि बीमारियों को मिलाकर करीब 10 से 12 तरह की सर्जरी की जाती हैं।
इन सर्जरियों में ऐलोपैथी और आयुर्वेदिक दोनों तरीके की सर्जरी शामिल हैं। ऐलोपैथी में करीब 3 तरह की तकनीकों से सर्जरी होती है, जैसे क्रायोथेरेपी, ओपन हेमरॉयडेक्टमी, रबर बैंड लिगेशन, लेजर सर्जरी आदि। रबर बैंड लिगेशन कम चीर-फाड़ वाली सामान्य सर्जरी होती है, जबकि बाकी इससे अलग होती हैं और लंबे समय तक आराम करना होता है।
आयुर्वेदिक सर्जरी में क्षारसूत्र, क्षारकर्म, अग्निकर्म आदि कई चिकित्साएं हैं। इसके अनुसार अगर किसी ने आयुर्वेदिक इलाज कराया है तो उसे कम से कम 10 दिन से 15 दिन तक आराम करने की जरूरत होती है, और ऐलोपैथी के इलाज में कम से कम 15 दिन से एक महीने तक आराम करना होता है।
सर्जरी के बाद मरीजों को क्या करने और क्या न करने के लिए बताया जाता है। खासतौर पर पाइल्स या फिशर-फिस्टुला की सर्जरी के बाद मरीज को कम से कम बैठने और ड्राइविंग न करने के लिए कहा जाता है। मरीज को चलने-फिरने, खड़े होने और लेटने की छूट रहती है, लेकिन ज्यादा देर तक बैठने से उसे कई परेशानियां हो सकती हैं।
ज्यादा लंबे समय तक बैठने से मरीज को कई दिक्कतें हो सकती हैं, जैसे कि सर्जरी के बाद पाइल्स वाली जगह पर खून आ सकता है, मरीज की रिकवरी लेट हो सकती है, और उसके आसपास के सेकेंडरी पाइल्स डेवलप होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए मरीज को आराम की सलाह दी जाती है।
इस प्रकार, पाइल्स सर्जरी के बाद मरीजों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसके बारे में जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। यह न केवल मरीजों के लिए, बल्कि उनके परिवार और देखभाल करने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

