Uttar Pradesh

राधा और कृष्ण के प्रेम को दर्शाती है बरसाना की लट्ठमार होली, जानिए क्या है परम्परा, क्यों शुरू हुई थी ये होली 

Agency:News18 Uttar PradeshLast Updated:February 05, 2025, 13:46 ISTबरसाना की लट्ठमार होली दुनियाभर में मशहूर है. ये लट्ठमार होली राधा और कृष्ण के प्यार को दर्शाती है. यह होली, बरसाना और नंदगांव में खेली जाती है. इस दिन महिलाएं पुरुषों पर लाठी मारती हैं और पुरुष महिलाओं से बचने…और पढ़ेंX

भगवान कृष्ण को राधा और गोपियों द्वारा लाठियों से पीटने का प्रतीक हैमथुरा: ब्रज के लिए बसंत पंचमी का पर्व बहुत खास होता है. इस दिन से ही ब्रज में होली की शुरुआत हो जाती है, लेकिन बरसाना की लठमार होली की अगर बात करें तो यहां की होली की एक अपनी अलग ही विशेषता है. इसकी होली की अलग ही मान्यता है. लठमार होली क्यों शुरू की गई और इसको किसने शुरू किया था, आइए जानते हैं.

दुनियाभर में प्रसिद्ध है बरसाना की लट्ठमार होली

 सब जग होली, बृज होरा ऐसा मेरा देश निगोड़ा. इसी कहावत के साथ यहां होली की शुरुआत हो जाती है. बसंत पंचमी एक ऐसा पर्व है, जो बृज के लिए अपना एक महत्व रखता है. बसंत ऋतु में लोग सरसों के पीले फूलों को देखकर होली का एहसास करते हैं. ब्रज में कई प्रकार की होली खेली जाती हैं और हर प्रकार की होली का एक अपना ही महत्व होता है. बरसाना की लठमार होली जग प्रसिद्ध है. इस लठमार होली की शुरुआत कैसे हुई थी, इस होली को किसने शुरू किया था, वह हम आपको बता रहे हैं.

राधा और कृष्ण के प्यार को दर्शाती है लट्ठमार होली

बरसाना की लट्ठमार होली, राधा और कृष्ण के प्यार को दर्शाती है. यह होली, बरसाना और नंदगांव में खेली जाती है. इस दिन महिलाएं पुरुषों पर लाठी मारती हैं और पुरुष महिलाओं से बचने के लिए ढाल का इस्तेमाल करते हैं. यह होली, भगवान कृष्ण को राधा और गोपियों द्वारा लाठियों से पीटने का प्रतीक है. इस दिन महिलाएं पारंपरिक पोशाक पहनती हैं. इस दिन पुरुष ख़ुशी-ख़ुशी लाठियों का वार सहन करते हैं. अगर कोई पुरुष पकड़ा जाता है, तो उसे महिलाओं की तरह कपड़े पहनने और नाचने के लिए मजबूर किया जाता है. होली के दिन सड़कों पर रंग भर दिए जाते हैं. स्थानीय लोग खुशी-खुशी केसुडो और पलाश के फूलों को भीड़ पर बरसाते हैं. नंदगांव के ग्वाल बाल बरसाना होली खेलने आते हैं. अगले दिन बरसाना के ग्वाल बाल नंदगांव जाते हैं.

यह होली, भगवान कृष्ण को राधा और गोपियों द्वारा लाठियों से पीटने का प्रतीक 

बरसाना में लट्ठमार होली की शुरुआत भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम से जुड़ी हुई है. मान्यता है कि कृष्ण और उनके मित्र नंदगांव से बरसाना में होली खेलने जाते थे. वहां राधा और उनकी सखियां उन्हें लाठियों से मारती थीं. इसी हास्य-विनोद से प्रेरित होकर लट्ठमार होली की परंपरा शुरू हुई. बरसाना में लट्ठमार होली, भगवान कृष्ण के काल में खेली जाने वाली लीलाओं में से एक है. इस दिन नंदगांव के पुरुष बरसाना में स्थित राधा रानी के मंदिर पर झंडा फहराने की कोशिश करते हैं. महिलाएं उन्हें लाठी मारकर खदेड़ती हैं. इस दौरान पुरुष गुलाल उड़ाकर महिलाओं को चकमा देने की कोशिश करते हैं. मान्यता है कि बरसाने की औरतों (हुरियारिनें) की लाठी जिसके सिर पर छू जाए, वह सौभाग्यशाली माना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु नेग में हुरियारिनों को रुपये और गिफ़्ट भी देते हैं.
Location :Mathura,Mathura,Uttar PradeshFirst Published :February 05, 2025, 13:41 ISThomeuttar-pradeshदुनियाभर में मशहूर है बरसाना की लट्ठमार होली, जानिए क्या है परंपरा

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