Uttar Pradesh

पटाखों से बिगड़ी खुशियों की रोशनी, बच्चों की आंखें बनीं सबसे बड़ी शिकार।

कानपुर में दीपावली की रौनक दर्द बन गई

कानपुर में हाल ही में मनाए गए दीपावली त्योहार की रौनक कई परिवारों के लिए दर्द बन गई। पटाखों की अंधाधुंध आतिशबाज़ी से पिछले 48 घंटों में 51 लोग आंखों की गंभीर चोटों के साथ अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें से 9 लोगों की रोशनी पूरी तरह से चली गई है। यह जानकारी डॉक्टरों ने दी है, जिन्होंने बताया कि अधिकांश मामले बच्चों के हैं, जिनकी आंखें पटाखों की चपेट में आकर झुलस गईं।

डॉक्टरों का कहना है कि पटाखों की चपेट में आकर आंखों की गंभीर चोटें हो सकती हैं। इन चोटों के कारण आंखों की रोशनी चली जा सकती है या आंखों को क्षति पहुंच सकती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हैं जो बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं।

कानपुर के अस्पतालों में पिछले 48 घंटों में आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि पटाखों की चपेट में आकर आंखों की चोटें होना आम बात है। लेकिन यह घटनाएं बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती हैं।

कानपुर के अधिकारियों ने कहा है कि वे पटाखों की बिक्री पर नियंत्रण लगाने के लिए कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि पटाखों की बिक्री पर नियंत्रण लगाने से आंखों की चोटें होने की संभावना कम हो सकती है।

कानपुर में दीपावली की रौनक दर्द बन गई। पटाखों की अंधाधुंध आतिशबाज़ी से 51 लोग आंखों की गंभीर चोटों के साथ अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें से 9 लोगों की रोशनी पूरी तरह से चली गई है। यह घटनाएं बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं।

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