Last Updated:January 15, 2026, 22:17 ISTअभी तक आपने 3 बीएचके, 4 बीएचके, लक्जरी होम्स, प्रीमियर रेजिडेंस, अल्ट्रा-लग्जरी अपार्टमेंट्स या विला आदि के बारे में सुना होगा लेकिन हाल ही में उत्तर भारत और खासतौर पर एनसीआर के रियल एस्टेट मार्केट में एक नया ट्रेंड सामने आया है सीनियर लिविंग होम्स. कुछ समय पहले तक दक्षिण और पश्चिम भारत में शुरू हुई इस लिविंग होम्स केटेगरी ने लक्जरी होम्स को भी पछाड़ दिया है. ये घर मिलेनियल्स के अलावा विदेशों में बैठे भारतीय युवाओं की हॉट चॉइस बन गए हैं. यही वजह है कि दिल्ली-एनसीआर के नोएडा और गुरुग्राम आदि शहरों में अब सीनियर लिविंग कॉन्सेप्ट की डिमांड बढ़ती जा रही है. आइए तस्वीरों के माध्यम से जानते हैं इनके बारे में..
क्या आप सीनियर लिविंग होम्स के बारे में जानते हैं? दक्षिण भारत में भले ही सीनियर लिविंग होम्स कॉन्सेप्ट का उदय हुआ हो लेकिन अब उत्तर भारत और खासतौर पर एनसीआर के रियल एस्टेट मार्केट में इस कॉन्सेप्ट ने तहलका मचा दिया है . यही वजह है कि अब बहुत सारे युवा इन होम्स की मांग कर रहे हैं. इतना ही नहीं नोएडा में इस कॉन्सेप्ट पर घर बनाने की शुरुआत भी हो चुकी है. सबसे खास बात है कि भले ही नाम से ये सीनियर लिविंग यानि सीनियर सिटिजंस के लिए हैं ऐसा लग रहा हो लेकिन अब ये युवाओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. सीनियर लिविंग होम्स मुख्य रूप से बुजुर्गों के लिए बनाए जाने वाले घर हैं, जो सीनियर सिटिजंस की हर जरूरत को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जा रहे हैं. यह उन लोगों के लिए बेहद कारगर हो रहे हैं जो बुजुर्ग दंपत्ति या अकेले बुजुर्ग यहां रह रहे हैं और उनके बच्चे विदेशों में हैं. इन घरों का सबसे बड़ा काम ही बुजुर्गों को रहने के छत देना नहीं है बल्कि हर वह लक्जरी देना है जिसकी उन्हें जरूरत हो सकती है साथ ही सुरक्षा, आराम और सामाजिक जुड़ाव के साथ सम्मान देना भी इस कॉन्सेप्ट की खासियतों में से एक है. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सिनियर लिविंग मार्केट का मूल्य 2025 में USD 3.55 बिलियन था जो 2030 तक 11.58 बिलियन यूएस डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है. बता दें कि ये घर बुजुर्गों की जरूरतों के हिसाब से तैयार किए गए हैं. इनमें सबसे खास चीजें हैं लेवल फ्लोरिंग, स्लिप-रेसिस्टेंट टाइल्स, ग्रैब बार्स, चौड़े दरवाजे, मोशन सेंसर लाइटिंग और इमरजेंसी पैनिक बटन जैसी सुविधाएं आदि. Add News18 as Preferred Source on Google बुजुर्गों के लिए इन होम्स में सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सबसे प्रमुख हैं. अधिकांश कम्युनिटी में 24×7 निगरानी, नियंत्रित प्रवेश, ऑन-साइट मेडिकल रूम, नर्सिंग सपोर्ट, डॉक्टर विजिट और अस्पताल से जुड़ाव मौजूद हैं. ताकि जरूरत पड़ने पर मदद तुरंत मिल सके. सुरक्षा के अलावा, ये कम्युनिटी वेलनेस और सामाजिक जुड़ाव को भी बढ़ावा देती हैं. एक्टिविटी जोन्स, गार्डन, रीडिंग लाउंज, योग और सांस्कृतिक प्रोग्राम बुजुर्गों को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय बनाए रखते हैं. इसके अलावा रोजमर्रा की सुविधाएं सहज और आसान हैं. इन घरों के परिसर में ही एक पेशेवर टीम हाउसकीपिंग, मेंटेनेंस, लॉन्ड्री और डाइटिशियन द्वारा तैयार भोजन संभालती है. जरूरत पड़ने पर पर्सनल केयर और असिस्टेड सर्विसेज भी उपलब्ध कराती है. एक तरह से ये घर बुजुर्गों को वे सभी सुविधाएं तुरंत प्रदान करते हैं जो घर में रहते हुए उनके बेटे-बेटियां और सगे-संबंधी प्रदान करते हैं. इन घरों को एक्सप्रेसवे, मेट्रो और इंटरसिटी कनेक्टिविटी के नजदीक बनाया जा रहा है, ताकि ये कम्युनिटी शहरों और सुविधाओं के करीब रहे लेकिन शांति और सुकून भी बरकरार रहे.यह बढ़ती सिनियर लिविंग केवल हाउसिंग का ट्रेंड नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक बदलाव है जो स्वायत्तता, देखभाल और साथ रहने को महत्व देता है. विचारपूर्वक डिजाइन किए गए ये समुदाय बुजुर्गों के जीवन के इस पड़ाव को सुरक्षित, आरामदायक और समर्थ बनाने का नया तरीका पेश कर रहे हैं. मानासर सीनियर लिविंग के को फाउंडर, अनंतराम वारायुर कहते हैं कि 2025 में सीनियर लिविंग का परिदृश्य एक अहम बदलाव के दौर में है. बढ़ती उम्र, बदलती पारिवारिक संरचनाएं और रियल एस्टेट सेक्टर की समझ अब बुज़ुर्गों की जरूरतों पर ज्यादा ध्यान दे रही है. माइग्रेशन, छोटे परिवार और व्यस्त जीवनशैली के कारण कई बुज़ुर्ग अब स्वतंत्र रूप से या केवल जीवनसाथी के साथ रहना पसंद कर रहे हैं. इसी बदलाव को देखते हुए डेवलपर्स ऐसे समुदाय बना रहे हैं, जहां बुज़ुर्गों के लिए आराम और सक्रिय जीवन सुनिश्चित हो. मनासुम इस वित्तीय वर्ष के अंत तक अपनी सीनियर लिविंग इन्वेंट्री को दोगुना कर लगभग 2,500 यूनिट्स तक ले जाने की योजना में है. वहीं आशियाना हाउसिंग के जेएमडी अंकुर गुप्ता कहते हैं कि उत्तर और पश्चिम भारत में दिल्ली एनसीआर, जयपुर और अहमदाबाद ऐसे बाजार बनकर उभर रहे हैं, जहां शहरी परिवार अपने बुज़ुर्ग माता-पिता के लिए व्यवस्थित और भरोसेमंद आवास विकल्प तलाश रहे हैं.जेएलएल–एएसएलआई रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 22,000 से अधिक सीनियर लिविंग यूनिट्स पहले से संचालित हैं और कुछ शहर व क्षेत्र इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत आगे दिखाई दे रहे हैं. बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, किफायती खर्च और वरिष्ठ नागरिकों व लौट रहे एनआरआई की मौजूदगी वाले स्थानों में स्वाभाविक रूप से अधिक परियोजनाएं देखने को मिल रही हैं.न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :January 15, 2026, 22:17 ISThomebusinessPHOTO: कैसे होते हैं सीनियर लिविंग होम्स? NCR में मचाया तहलका, विदेशों में…
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