पीलीभीत : किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य के बीच बसा पीलीभीत का एक गांव जल्द ही दूसरे स्थान पर बसाया जाएगा. इसको लेकर शुरुआती सर्वे पूरा कर लिया गया है. अधिकांश ग्रामीणों ने भी गांव को ख़ाली कर अन्य जगह पर बसने में अपनी सहमति जताई है. इसको लेकर अग्रिम कारवाई प्रशासन स्तर पर की जा रही है. दरअसल, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और खीरी जिले एक दूसरे से सीमा साझा करते हैं. वहीं दोनों जिलों के वन क्षेत्र भी एक दूसरे से जुड़े हैं. पीलीभीत ज़िले के कई गांव ऐसे हैं जो खीरी जिले के वन क्षेत्र से सटकर बसे हुए हैं. इनमें से एक चलतुआ गांव किशनपुर वाइल्ड लाइफ़ सेंचुरी के बीचों-बीच स्थित है. इस गांव में पहुंचने के लिए तकरीबन 4 किलोमीटर घने जंगलों से गुज़रना पड़ता है.यह गांव चारों तरफ से साल के घने जंगलों से घिरा हुआ है. ऐसे में इस गांव में अक्सर इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष की देखने को मिलता है. बीते वर्ष इलाके में जंगली हाथी ने किसान को कुचल दिया था. वहीं बाघिन को लाठियों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतारने का मामला भी सामने आया था. तकरीबन 7 महीने पहले ग्रामीणों ने पीलीभीत जिलाधिकारी संजय कुमार को अपनी समस्याओं से अवगत कराया था. जिसके बाद डीएम ने एसडीएम पूरनपुर, डीएफओ और एसडीओ की संयुक्त टीम गठित की थी.ग्रामीणों ने चुना जमीन का विकल्पशुरुआती सर्वे में अधिकांश ग्रामीणों ने तो किसी अन्य इलाक़े में जमीन के एवज में गांव छोड़ने पर सहमति जताई है. गांव छोड़ने वाले ग्रामीणों को 15 लाख रुपए या फिर 2 हेक्टेयर जमीन देने का विकल्प तय किया गया है. शुरुआती सर्वे के सकारात्मक रुझान आने के बाद प्रशासन की ओर से गांव को ख़ाली कराने की कवायद शुरू कर दी गई है. पूरे मामले पर अधिक जानकारी देते हुए पूरनपुर एसडीएम अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि उन्हें जांच रिपोर्ट मिल गई है. जिसमें अधिकांश लोगों की ओर से ज़मीन का विकल्प चुना गया है. गांव में रह रहे लोगों की ज़मीनों का सत्यापन किया जाएगा. इसके बाद अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.FIRST PUBLISHED : January 9, 2025, 21:42 IST
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