Uttar Pradesh

परवल खेती : राजेंद्र-1 से स्वर्ण रेखा तक…परवल की ये टॉप वैरायटी, क्या है 9:1 वाला फॉर्मूला, जानें बंपर पैदावार का सीक्रेट

परवल की खेती गर्मियां के लिए बेस्ट है

परवल की खेती किसानों की किस्मत बदल सकती है. गर्मियां इसे उगाने के लिए बेस्ट है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, परवल की बेलें तेजी से ग्रोथ करती हैं और समय पर फूल व फल देने लगती है. बस इसी के चलते किसान इस समय खेत की तैयारी से लेकर रोपाई तक के काम में तेजी लाते है. परवल की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले खेत का सही चयन जरूरी है कि आखिर खेत इसके योग्य है या नही. जल निकासी वाली, जीवांशयुक्त बलुई या उपजाऊ दोमट मिट्टी इस फसल के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है.

जल निकासी वाली मिट्टी की खासियत है कि इसमें जल निकासी की क्षमता अधिक होती है, जिससे पौधों को पर्याप्त पानी मिलता है. इसके अलावा, जीवांशयुक्त बलुई मिट्टी में जीवाणु की उपस्थिति होती है, जो पौधों को स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं. उपजाऊ दोमट मिट्टी में भी पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है, जिससे उनकी ग्रोथ अच्छी होती है.

खेत की गहरी जुताई 2 से 3 बार करके मिट्टी को भुरभुरी बनानी चाहिए. उसमें लगभग 5 टन सड़ी हुई गोबर की खाद अच्छी तरह मिलाना बेहतरीन उपाय है. लगभग 70 किलोग्राम डीएपी भी डालने से पौधों को शुरुआती पोषण मिल जाते हैं.

परवल में नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर आते हैं, इसलिए बेहतर परागण और अधिक उत्पादन के लिए 9 मादा पौधों के साथ 1 नर पौधा लगाना जरूरी है. यही संतुलन खेत में फल बनने की प्रक्रिया को तेज कर बंपर पैदावार देने में अहम भूमिका निभाता है. परवल की खेती बीज से नहीं, बल्कि जड़ों के कंद या बेल की लच्छियों से की जाती है. रोपाई के लिए लगभग 2 मीटर लंबी और चौड़ी बेल पर्याप्त होता है. एक एकड़ खेत में करीब 3500 से 4000 पौधों की जरूरत होती है. रोपाई के समय खेत में नालियां बनाकर कतार से कतार की दूरी लगभग 2 मीटर और पौध से पौध की दूरी लमसम 1 मीटर रखनी चाहिए.

रोपण के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें और बाद में मौसम के अनुसार, 10 से 15 दिन के अंतर पर पानी दिया जा सकता है. पौधों की बढ़वार के लिए 20 से 25 दिन बाद लगभग 20 किलोग्राम यूरिया और तीन महीने बाद पोटाश दें. बेलों को ऊपर चढ़ाने के लिए मचान या बांस का सहारा दिया जाता है, जिससे फल साफ और स्वस्थ बनते हैं. हालांकि, परवल की खेती के लिए मचान विधि बहुत उपयोगी है. फल मक्खी जैसे कीटों से बचाव के लिए हर 15 दिन में कीटनाशक का छिड़काव भी जरूरी होता है. किसानों के बीच राजेंद्र-1, राजेंद्र-2 और स्वर्ण रेखा जैसी उन्नत किस्में काफी लोकप्रिय हैं. सही देखभाल और उपयुक्त मिट्टी मिलने पर एक एकड़ में लगभग 50 से 60 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है.

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गंगा और घाघरा नदी के आसपास के क्षेत्रों में परवल की खेती खासतौर पर खूब फल-फूल रही है. यहां से परवल अन्य प्रदेशों में भी भेजा जाता है. बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. सब्जी के साथ-साथ इसका अचार और मिठाइयों में भी इस्तेमाल हो रहा है.

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Uttar PradeshMar 17, 2026

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