Uttar Pradesh

पारंपरिक मिठाई और बेटी की विदाई! देसी स्वाद आज भी बरकार, जाने खाजा का इतिहास – उत्तर प्रदेश समाचार

बलिया की पारंपरिक खजुली मिठाई आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रही है. यह मिठाई पीढ़ियों से लोगों की जुबान पर राज करती आ रही है. इसका स्वाद पीढ़ियों से लोगों को पसंद आ रहा है और आज भी बड़ी-बड़ी महंगी मिठाइयों को टक्कर देती है. लगन का मौसम आते ही इसकी मांग आसमान छूने लगती है और हर घर में इसकी चर्चा शुरू हो जाती है. इस खास मिठाई को खजुली या खाजा के नाम से जाना जाता है और इसे मैदे से तैयार किया जाता है. यह परतदार मिठाई कुरकुरी बनावट और मीठी चाशनी के संग दिल जीत लेती है. शादी-ब्याह, तिलक और खासकर बेटी की विदाई में इसे शुभ माना जाता है. बिना खजुली के मानो रस्में अधूरी सी लगती हैं. इस खजुली मिठाई का इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है. स्थानीय कारीगरो के मुताबिक, यह मिठाई प्राचीन काल से बनती चली आ रही है. यह मिठाई कई दुकानों की विरासत के रूप में सैकड़ों साल पुरानी मानी जाती है. इसी के चलते इसका स्वाद समय के साथ बदला नहीं, बल्कि और निखरता गया है. इसे बनाने की प्रक्रिया बहुत मजेदार है. दुकानदार मुन्ना बताते हैं कि, इसको बनाने के लिए सबसे पहले मैदे को गुनगुने पानी और रिफाइंड तेल के साथ अच्छी तरह गूंथा जाता है, फिर इसकी पतली रोटियां बेलकर कई परतें बनाई जाती हैं. इन्हें लंबा आकार देकर तेल में सुनहरा तला जाता है, जिससे इसका स्वाद निखर आता है. इसको तेल में तलने के बाद गर्मागर्म चीनी की चाशनी में डाल दिया जाता है. यही चाशनी इसकी मिठास और चमक को बढ़ाती है. यह मिठाई महीनों तक सुरक्षित रह सकती है. सफर में ले जाने और रिश्तेदारों को भेंट करने के लिए भी लोग इसे खास तौर पर खरीदते हैं. लगन के दिनों में इस मिठाई की मांग काफी बढ़ जाती हैं. अगर इस मिठाई के कीमत की बात करें, तो लगभग 160 से 180 रुपए प्रति किलो तक मिल जाती है. सस्ती होने के बावजूद इसका स्वाद बेहद लाजवाब है. लगन के दिनों में इन दुकानों पर बहुत भीड़ होती है और कारीगर दिन-रात इसे तैयार करने में जुटे रहते हैं. एक बार खाने के बाद लोग इसके स्वाद के दीवाने हो जाते हैं. ग्राहक राघवेंद्र सिंह के अनुसार, यह न केवल एक देसी मिठाई है, बल्कि भावनाओं का स्वाद भी है. बेटी की विदाई हो, शादी, तिलक जैसे हर शुभ अवसर पर यह मिठास रिश्तों को और मजबूत करती है. बदलते दौर में भी इसका जलवा कायम है. यही वजह है कि बलिया की पारंपरिक खजुली मिठाई आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रही है. कभी अगर आप भी बलिया आए, तो बलिया रेलवे स्टेशन से निकलकर शहीद पार्क चौक होते हुए शनिचरी मंदिर के पास जरूर पहुंचे. क्योंकि, यहीं पर मशहूर मुन्ना स्वीट्स की देसी पुरानी दुकान स्थित है, जहां यह पारंपरिक मिठाई खास अंदाज में तैयार की जाती है.

You Missed

Nearly 20 Pc Voter Turnout Recorded Since The Start In Koridang
Top StoriesApr 9, 2026

कोरीदांग में मतदान शुरू होने के बाद से लगभग 20 प्रतिशत मतदाता मुद्रीकरण दर्ज किया गया है।

कोरिडांग विधानसभा उपचुनाव में पहले दो घंटों में लगभग 20 प्रतिशत मतदाताओं ने अपना मतदान किया: नागालैंड की…

Scroll to Top