Uttar Pradesh

पानी को कैसे-कैसे किया जाता है शुद्ध, क्या RO से भी ज्यादा साफ सरकारी जल? जांच एक्सपर्ट ने बताए सारे मानक

मिर्जापुर: आपके घरों में नल के माध्यम से पीने वाला पानी क्या वाकई में पीने लायक है. हर घर नल के तहत जो पानी आ रहा है, उसमें कितनी शुद्धता है. आपके यहां जो पानी है, वह आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है, यह सवाल आपके मन में रहता है. पानी की शुद्धता के साथ ही उसकी गुणवत्ता की जांच कैसे की जाती है और किन पैरामीटर की जांच के बाद पानी आपके घरों तक पहुंचता है, इसे जानने के लिए हम जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला में पहुंचे और पानी की जांच की पूरी प्रक्रिया से रुबरु हुए.

जिला स्तरीय जल प्रशिक्षण प्रयोगशाला में रासानिक व माइक्रोबायोलॉजिकल, दोनों विधि से जांच होती है. इसके साथ ही 18 पैरामीटर को परखा जाता है. हर घर जल योजना के तहत 9 अलग लेबोरेटरी जिले में बनाए गए हैं, जहां से जांच के बाद पानी की सप्लाई की जाती है.

ऑफलाइन और ऑनलाइन सैम्पल कलेक्ट से जांच

जल परीक्षण प्रयोगशाला के टेक्नीशियन अजित कुमार पांडेय ने लोकल 18 को बताया कि जनपदीय जल विश्लेषण प्रयोगशाला है, उसमें दो प्रकार से जांच होती है. जल की जांच के लिए ऑनलाइन सैम्पल कलेक्टिंग की सुविधा है. वहीं ऑफलाइन भी सैम्पल कलेक्ट करने के बाद जांच करते हैं. रोस्टर वाइज हम लोगों को टारगेट मिलता है और उसी टॉरगेट को हम लोग पूरा करते हैं.

उन्होंने बताया कि जिले में प्रत्येक ब्लॉक के अलग-अलग गांवों से सैम्पल लिया जाता है, जिसके बाद हम लोग जांच करते हैं. सैम्पल कलेक्ट करने के लिए सैंपलिंग टीम है, जिनको वाहन मिले हुए हैं. वह अलग-अलग जगहों पर जाकर सैम्पल लेकर आते हैं और प्रोसेस के माध्यम से जांच के बाद रिजल्ट अपलोड किया जाता है.

पानी में दो चीजों की होती है जांच

अजित पांडेय ने बताया कि पानी के अंदर दो प्रकार की जांच होती है. इसमें पहला केमिकल एनालिसिस और दूसरा माइक्रोबायोलॉजिकल जांच की जाती है. केमिकल एनालिसिस का मानक है, उसी के अनुसार जांच होती है. माइक्रो बायोलॉजिकल में बैक्टीरिया आदि की जांच की जाती है. केमिकल पैरामीटर में 12 प्रकार की जांच के लिए हमें प्रमाण मिला हुआ है, लेकिन यहां पर 18 तरीके की पैरामीटर जांच होती है. माइक्रो बायलॉजिकल में ईकोलाई जो आंतों को नुकसान पहुंचाता है और दूसरे टोटल कोलीफार्म में सबकुछ आ जाता है. रासायनिक और जीवाणु परीक्षण दो तरह की जांच यहां पर होती है.

18 पैरामीटर की होती है परख

अजित पांडेय ने बताया कि प्रत्येक पैरामीटर की अलग-अलग मशीनें लगाई गई हैं. मशीन की भी समय-समय पर जांच कराई जाती है, ताकि ये पता चल सके कि रिजल्ट सही आ रहा है कि नहीं आ रहा है. पीएच के लिए पीएच मीटर व फ्लोराइड ऑन मीटर, जो एक लीटर में एक मिलीग्राम होना चाहिए, उसकी भी जांच हो जाती है. यहां पर कंडक्टविटी मीटर है. अलग-अलग मशीनें यहां पर मौजूद हैं.

काफी शुद्ध है यहां का पानी

अजित पांडेय ने बताया कि यहां पर पानी काफी शुद्ध है, लेकिन कुछ जगहों पर पानी में गन्दलापन रहता है. कहीं-कहीं पर आयरन ज्यादा पाया जाता है. यह पहाड़ी इलाकों में थोड़ा ज्यादा है. जनरली पानी अभी ठीक है. जल जीवन मिशन के तहत जो हर-घर जल दिया जा रहा है, आम लोगों को उसपर ज्यादा भरोसा करना चाहिए. वहां पर पानी की जांच के लिए 9 लेबोरेटरी बनाई गई है. वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट पर जांच के बाद पानी घरों तक पहुंचता है. नियमित जांच के बाद ही वह पानी घरों तक जा रहा है. फिजिकल पैरामीटर से इंसान पहचान लेता है, लेकिन केमिकल व बैक्टीरिया को इंसान नहीं देख पाता है. यह जांच में ही पता चलता है.

ऐसे करा सकते हैं जांच

अजित पांडेय ने बताया कि आम लोगों की सहूलियत के लिए भी यह वेबसाइट है. यहां पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं, चाहे घर सेंपल हो, होटल का हो या किसी उद्योग का हो. इसी पोर्टल के माध्यम से जांच करा सकते हैं. एफएसएसएआई ने भी मानक निर्धारित किया है, जिसे सभी को पालन करना होता है. जांच के बाद ऑनलाइन ही रिपोर्ट मिल जाता है.

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