हिंदू धर्म में होली और दीपावली सबसे बड़े पर्व माने जाते हैं. होली के मौके पर लोग एक-दूसरे को अबीर और गुलाल लगाकर आपसी सौहार्द, प्रेम और रिश्ते को मजबूत करते हैं. इस बार होली को लेकर लोगों में कई तरह का कन्फ्यूजन भी देखने को मिल रहा है. लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब होली है. हिंदू पंचांग में 3 मार्च को होली का जिक्र है, लेकिन 3 मार्च को ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है, जिसका सूतक कल सुबह 7:00 से मान्य होगा. सूतक काल के दौरान कोई भी उत्सव नहीं किया जाता.
हिंदू धर्म के जानकार बताते हैं कि ऐसी स्थिति में होली अगले दिन ही खेली जाएगी, यानी 4 मार्च को होली खेली जाएगी. इस दिन अयोध्या के राम दरबार में फूल और गुलाल की होली होगी. प्रभु राम को फगुआ गीत सुनाए जाएंगे. 56 व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा. अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि है, जिसका शुभारंभ शाम 5:18 से हो रहा है. इसी के साथ भद्रा काल भी आरंभ हो रहा है. पूरी रात्रि में भद्रा का काल रहेगा. भद्रा में पुच्छ काल का भी समय होता है. उस समय होलिका दहन होगा. यानी 2 मार्च को रात्रि 12:50 से लेकर 2:02 के बीच होली का दहन किया जाएगा. दूसरी तरफ हिंदू पंचांग के अनुसार, 3 मार्च को होली का पर्व है, लेकिन 3 मार्च को ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है. चंद्र ग्रहण के 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है. सूतक काल में किसी प्रकार उत्सव नहीं मनाया जाता है इसलिए वैदिक परंपरा के अनुसार 4 मार्च को अयोध्या में होली मनाई जाएगी.
राम मंदिर ट्रस्ट के सहयोगी और विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि अयोध्या के राम मंदिर में 4 मार्च को होली का उत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाएगा. भक्त से लेकर भगवान तक एक दूसरे को अबीर और गुलाल लगाएंगे. इस दिन अयोध्या के मठ मंदिरों में लाखों की संख्या में भक्तों के पहुंचने का अनुमान है.

