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ओवल टेस्ट में भारत को मिला सबसे नायाब ऑलराउंडर, जडेजा और सुंदर जैसा घातक, बनेगा महान खिलाड़ी



IND vs ENG: टीम इंडिया को एक नायाब ऑलराउंडर मिल गया है, जो आने वाले वक्त में उसे दुनिया की नंबर-1 टेस्ट टीम बना देगा. यह क्रिकेटर रवींद्र जडेजा और वॉशिंगटन सुंदर जैसा ही घातक है. अपने टैलेंट का ट्रेलर दिखाकर इस क्रिकेटर ने यह साबित कर दिया है कि वह जल्द ही भारत के महान खिलाड़ियों में शुमार होगा. भारत का यह क्रिकेटर विस्फोटक बल्लेबाजी के अलावा कातिलाना तेज गेंदबाजी में भी माहिर है. यह क्रिकेटर गेंदबाजी के दौरान अपनी मारक सीम मूवमेंट से विरोधी टीम के बल्लेबाजों के लिए काल साबित होता है.
ओवल टेस्ट में भारत को मिला सबसे नायाब ऑलराउंडर
दरअसल, ओवल टेस्ट भारत के लिए बहुत यादगार है. इस टेस्ट मैच के दौरान भारत को आकाशदीप के रूप में एक नायाब ऑलराउंडर मिल गया है. आकाशदीप ने साबित कर दिया कि वह बैटिंग और बॉलिंग में भारतीय टेस्ट टीम को कितनी मजबूती दे सकते हैं. ओवल टेस्ट के दूसरे दिन भारत की दूसरी पारी के दौरान आकाशदीप नाइट-वॉचमैन के तौर पर स्टंप्स से ठीक पहले बल्लेबाजी के लिए उतरे. भारत का स्कोर तब 70/2 था और वह इंग्लैंड से केवल 47 रन ही आगे चल रहा था.
मैच दिया पूरा मैच
ऐसे नाजुक मौके पर आकाशदीप ने हार नहीं मानी और यशस्वी जायसवाल के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 150 गेंदों पर 107 रन जोड़े. यशस्वी जायसवाल ने 164 गेंदों पर 118 रनों की पारी खेली. आकाशदीप ने नाइट-वॉचमैन के रूप में बल्लेबाजी करते हुए अपना पहला टेस्ट अर्धशतक बनाया. आकाशदीप ने 94 गेंदों में 12 चौकों की मदद से 66 रनों की शानदार पारी खेली. आकाशदीप अगर यहां जल्दी आउट हो जाते तो भारत की पारी लड़खड़ा सकती थी. आकाशदीप ने यह साबित कर दिया कि वह भारत के बेस्ट फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर बन सकते हैं.
धारदार सीम बॉलिंग के बादशाह
आकाशदीप अपनी धारदार सीम बॉलिंग के लिए जाने जाते हैं. आकाशदीप मैच के किसी भी हालात में विकेट लेने में माहिर हैं. आकाशदीप की सबसे बड़ी खूबसूरती ये है कि वह नई और पुरानी गेंद से विकेट निकालने का टैलेंट रखते हैं. आकाशदीप के पास रफ्तार के साथ बेहतरीन स्विंग भी है, जिसके कारण वह बल्लेबाजों के लिए बेहद खतरनाक साबित होते हैं. आकाशदीप ने अभी तक 10 टेस्ट मैचों की 18 पारियों में 27 विकेट झटके हैं. आकाश दीप ने इस दौरान 34.52 की औसत से गेंदबाजी की है. आकाश दीप ने 23 फरवरी 2024 को इंग्लैंड के खिलाफ रांची में अपना टेस्ट डेब्यू किया था.
पिता बनाना चाहते थे सरकारी अफसर
आकाश दीप का सबसे बड़ा हथियार उनकी स्विंग है. आकाश दीप की अंदर आती गेंद का विरोधी टीम के बल्लेबाजों के पास कोई जवाब नहीं होता. आकाश दीप ने जब भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था तो उस दौरान उनकी मां ने एक इंटरव्यू दिया था. उनकी मां ने कहा, ‘उसके पिता हमेशा उसे सरकारी अधिकारी बनाना चाहते थे, लेकिन क्रिकेट उसका जुनून था और मैंने उसका हमेशा साथ दिया. मैं उसे छुपकर क्रिकेट खेलने भेज देती थी. उस समय अगर कोई सुनता कि तुम्हारा बेटा क्रिकेट खेल रहा है तो वे कहते, ‘ये तो आवारा मवाली ही बनेगा’. लेकिन हमें उस पर पूरा भरोसा था और छह महीने के अंदर मेरे मालिक (पति) और बेटे के निधन के बावजूद हमने हार नहीं मानी क्योंकि हमें आकाशदीप पर भरोसा था.’
फरवरी 2015 में पिता और भाई की हो गई मौत
आकाशदीप के पिता रामजी सिंह सरकारी हाई स्कूल में ‘फिजिकल एजुकेशन’ शिक्षक थे और वह कभी भी अपने बेटे को क्रिकेटर नहीं बनाना चाहते थे. सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें लकवा मार गया और पांच साल तक बिस्तर पर रहे. उन्होंने फरवरी 2015 में अंतिम सांस ली. इसके बाद आकाशदीप के बड़े भाई धीरज का भी निधन हो गया. बड़े भाई की पत्नी और उनकी दो बेटियों की जिम्मेदारी भी आकाशदीप के ही ऊपर थी.
रेत बेचने का बिजनेस शुरू किया
पूरा परिवार पिता की मासिक पेंशन पर निर्भर था तो आकाशदीप ने क्रिकेट के जुनून को छोड़कर कमाई का साधन जुटाने पर ध्यान लगाना शुरू किया. वह छह भाई बहनों में सबसे छोटे हैं जिसमें तीन बहन बड़ी हैं. पहले आकाशदीप ने धीरज के निधन के बाद डंपर किराए पर लेकर बिहार-झारखंड सीमा पर सोन नदी से रेत बेचने का बिजनेस शुरू किया. तब वह टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते थे और उन्हें अपने क्रिकेट के सपने को साकार करने के लिए मदद की जरूरत थी.
आकाशदीप की जिंदगी आसान नहीं रही
आकाशदीप के चचेरे भाई बैभव ने ‘लेदर बॉल’ क्रिकेट में कोचिंग दिलाने में मदद की. बैभव ने कहा, ‘उसकी प्रतिभा को देखकर मैं उसे दुर्गापुर ले गया जहां उसका पासपोर्ट बनवाया और वह दुबई में टूर्नामेंट खेलने गया.’ फिर बेहतर मौके खोजने के लिए दोनों कोलकाता पहुंचे और केस्तोपुर में किराए के फ्लैट में रहने लगे. लेकिन जिंदगी आसान नहीं थी क्योंकि आकाशदीप को तीन क्ल्ब यूनाईटेड सीसी, वाईएमसीए और कालीघाट ने खारिज कर दिया. बैभव ने कहा, ‘उन्होंने एक और साल इंतजार करो. मुझे लगा वह वापस चला जाएगा. लेकिन यूसीसी ने उसे एक दिन बुलाया और कहा कि वे किसी भी भुगतान के बिना उसे खिलाएंगे.’



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