डायबिटीज क्रॉनिक मेटाबॉलिक डिजीज है, जिसका कोई ठोस इलाज नहीं है. मरीज को जिंदगी भर इस कंडीशन के साथ ही जीना होता है. यह बीमारी तब होती है, जब शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो या कम हो जाता है, जिससे खून में शुगर का लेवल जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है.
इस बीमारी की खास बात यह है कि इसे आप हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतों से कंट्रोल कर सकते हैं. यानी की यदि आपका ब्लड शुगर बिना कुछ भी खाएं 100 and 125 mg/dL या 126 mg/dL है, जिसका मतलब प्री-डायबिटीज और डायबिटीज होता है, तो इसे आप हेल्दी डाइट, टाइम पर खाना, सोना और रेगुलर एक्सरसाइज से कंट्रोल कर सकते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग नहीं जानते कि इसके साथ स्ट्रेस मैनेजमेंट भी करना बहुत जरूरी है.
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स्ट्रेस से बढ़ सकता है ब्लड शुगर
तनाव के दौरान शरीर में कुछ हार्मोन जैसे एड्रेनलिन और कोर्टिसोल का रिलीज होता है, जो ब्लड शुगर को को बढ़ा सकते हैं. खासकर टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को यह स्थिति और भी मुश्किल में डाल सकती है. ऐसे में हैदराबाद के यशोदा अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट फिजीशियन और डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी ने एक मीडिया संस्थान को इससे बचने के तरीके बारे में बताया है, जो आपके लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है.
तनाव का कारण
बीमारी, चोट या सर्जरी जैसी कंडीशन तनाव का कारण बन सकती हैं. इसके अलावा डायबिटीज के कारण रोजाना की आदतों में बदलाव, स्ट्रिक्ट डाइट से भी कई लोग चिंता में आ सकते हैं.
स्ट्रेस से बढ़ सकता है इंसुलिन प्रतिरोध
बहुत ज्यादा स्ट्रेस से इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ सकता है, जिससे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का प्रभावी रूप से उपयोग नहीं कर पाती हैं. यह स्थिति टाइप 2 डायबिटीज को जानलेवा भी बना सकता है.
ज्यादा स्ट्रेस जानलेवा साबित हो सकती है
तनाव और हाई ब्लड शुगर डायबिटीज मरीजों में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज, न्यूरोपैथी और किडनी संबंधित समस्याएं के जोखिम को बढ़ा सकती है. इसलिए दिमाग को शांत रखना जरूरी है.
ऐसे करें स्ट्रेस मैनेजमेंट
– गहरी सांस लेने, ध्यान (मेडिटेशन) और योग जैसी तकनीकों से तनाव को कम किया जा सकता है. – शारीरिक गतिविधि न केवल तनाव को कम करती है, बल्कि ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी मदद करती है.
– समूहों या काउंसलिंग से मानसिक और इमोशनल सपोर्ट मिलता है, जो तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है.
– किसी भी स्थिति से लड़ने के लिए उसे स्वीकार करना जरूरी है. ध्यान रखें आपकी लड़ाई बीमारी से है खुद से नहीं. इसलिए अपने सोच में भी कभी बीमारी को जीतने न दें.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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