Last Updated:January 27, 2026, 23:59 ISTNoida software engineer death case : आज अदालत में इस केस की सुनवाई हुई. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विवेचक को पूरी फाइल, सभी दस्तावेजों के अध्ययन और तथ्यों के साथ उपस्थित होना होगा. लापरवारी नहीं चलेगी. पुलिस को निर्देश दिया है कि वह दो दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट में अब तक की गई जांच और आरोपियों की भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्ज करे, ताकि तय किया जा सके कि किस स्तर पर लापरवाही या आपराधिक कृत्य हुआ है. मामले की अगली सुनवाई अब 29 जनवरी और 2 फरवरी को होगी.सॉफ्टवेयर इंजीनियर मौत मामला, तीनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ी, सीजेएम कोर्नोएडा. दिल्ली से सटे नोएडा सेक्टर-150 के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत के मामले में मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में अहम सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने तीनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है. लोटस ग्रीन बिल्डर से जुड़े कर्मचारी रवि बंसल और सचिन करनवाल की न्यायिक हिरासत 29 जनवरी 2026 तक बढ़ाई गई, जबकि एमजेड विजटाउन बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार को 2 फरवरी 2026 तक जेल में रहना होगा. अदालत ने मामले की विवेचना में ढिलाई बरतने पर विवेचक को कड़ी फटकार भी लगाई है.
क्या बोला बचाव पक्ष
मामले की सुनवाई दोपहर बाद करीब तीन बजे शुरू हुई. लोटस ग्रीन बिल्डर की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील रखते हुए कहा कि जिन दो कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वे न तो कंपनी के डायरेक्टर हैं और न ही किसी तरह के नीति निर्धारण या निर्णय लेने वाले अधिकारी. बचाव पक्ष ने दोनों आरोपियों को वेतनभोगी कर्मचारी बताते हुए कहा कि वे केवल जूनियर स्तर पर कार्यरत थे और उन्हें मुनीम या कार्यालयीन स्टाफ की तरह काम करने वाला बताया गया. बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासनिक दबाव में बिना पूरी और निष्पक्ष जांच के आनन-फानन में गिरफ्तारी की गई. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की गिरफ्तारी संबंधी गाइडलाइन के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पुलिस ने न तो गिरफ्तारी के ठोस कारण बताए और न ही यह स्पष्ट किया कि किन तथ्यों के आधार पर आरोपियों को सीधे जेल भेजा गया. अधिवक्ताओं ने इसे प्रक्रिया की गंभीर अनदेखी बताया.
500 पन्नों की रिपोर्ट
अदालत को यह भी बताया गया कि कंपनी की ओर से लगभग 500 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है. इस रिपोर्ट में घटनास्थल से जुड़ी तकनीकी जानकारियां, जीपीएस युक्त सैटेलाइट इमेज, पुराने रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेज शामिल हैं. बचाव पक्ष का कहना था कि वर्ष 2021 में जिस नाले के टूटने की बात सामने आई थी, उसी समय से उस क्षेत्र में पानी भरने की समस्या बनी हुई थी. इस संबंध में नोएडा प्राधिकरण को पहले ही सूचित किया गया था और मरम्मत के लिए फंड भी स्वीकृत हुआ था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्य नहीं कराया गया. रिमांड पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने यह तर्क भी रखा कि पूरे मामले की जिम्मेदारी निचले स्तर के कर्मचारियों पर डालना न्यायसंगत नहीं है. बड़े बिल्डर, कंपनी के मालिक और शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी अब भी गिरफ्तारी से बाहर हैं, जबकि केवल कर्मचारियों को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया है. इसी आधार पर बचाव पक्ष ने रिमांड निरस्त करने और नियमित जमानत देने की मांग की.
विवेचक पर क्यों भटका कोर्ट
सुनवाई के दौरान जब अदालत ने विवेचक से कंपनी की ओर से दी गई 500 पन्नों की रिपोर्ट के अध्ययन के संबंध में सवाल किया तो विवेचक ने जवाब दिया कि रिपोर्ट काफी बड़ी होने के कारण उसे पूरी तरह पढ़ने का समय नहीं मिल सका है और इसके लिए कुछ और दिन की आवश्यकता है. विवेचक के इस जवाब पर बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और कहा कि जब विवेचना ही पूरी नहीं हुई है, तो गिरफ्तारी किस आधार पर की गई. विवेचक के जवाब से अदालत संतुष्ट नजर नहीं आई. सीजेएम ने कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान भी विवेचक को निर्देश दिए गए थे कि अगली तारीख पर पूरी तैयारी के साथ अदालत में उपस्थित हों, लेकिन इसके बावजूद रिपोर्ट का अध्ययन नहीं किया गया. इस लापरवाही पर अदालत ने विवेचक को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि इस तरह की गंभीर और संवेदनशील घटना में जांच एजेंसी से पूरी तत्परता और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है. मामले की अगली सुनवाई अब 29 जनवरी और 2 फरवरी 2026 को होगी.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar PradeshFirst Published :January 27, 2026, 23:59 ISThomeuttar-pradesh’रिपोर्ट पढ़ने का समय नहीं मिला’, इंजीनियर मौत मामले में भड़की अदालत

