Uttar Pradesh

नोएडा: ‘इंजीनियर की मौत वाले गड्ढे’ का मालिक कौन? 3 दिन बाद भी नोएडा प्राधिकरण बेखबर, जांच के लिए बनी कमेटी

Noida Techie Death Case: नोएडा सेक्टर-150 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत के तीन दिन बीत जाने के बाद भी नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) यह पता लगाने में नाकाम रहा है कि आखिर ‘मौत के गड्ढे’ का मालिक कौन है, जिसने 27 साल के युवराज की जान ले ली. सिस्टम की सुस्ती का आलम यह है कि जिस जमीन पर 40 फीट गहरा और पानी से लबालब भरा गड्ढा मौत का जाल बना खड़ा था, उसके मालिकाना हक को लेकर अफसर फाइलों में उलझे हुए हैं.

स्पोर्ट्स सिटी की फाइलों में गुम ‘जिम्मेदार’ का नामप्राधिकरण के दस्तावेजों के मुताबिक, सेक्टर-150 का भूखंड संख्या SC-02 मूल रूप से लोटस ग्रीन (Lotus Greens) को आवंटित किया गया था. इस 13.29 लाख वर्ग मीटर के विशाल भूखंड के 2014 के बाद 24 सब-डिवीजन किए गए. लोटस बिल्डर ने मुनाफे के लिए जमीन के छोटे-छोटे हिस्से अन्य बिल्डरों को बेच दिए. अब प्राधिकरण को यह याद नहीं कि जिस खास हिस्से पर यह हादसा हुआ, उसे लोटस ने किसे बेचा था.

ACEO सतीश पाल ने मीडिया को बताया, भूखंड के आवंटी, नक्शे की मंजूरी और निर्माण न होने पर की गई कार्रवाई की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है. समिति की रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी.

दो घंटे तक मौत से जंग और सिस्टम की बेरुखीहादसा 16 जनवरी की रात का है. गुरुग्राम से लौट रहे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार घने कोहरे के कारण सड़क किनारे बने एक निर्माणाधीन मॉल के 20-40 फीट गहरे बेसमेंट में जा गिरी. युवराज ने कार की छत पर खड़े होकर अपने पिता को फोन किया, ‘पापा, मैं डूब रहा हूं, मुझे बचा लो.’ पिता मौके पर पहुंचे, पुलिस और दमकल की टीमें भी आईं, लेकिन घंटों तक ‘रेस्क्यू’ के नाम पर सिर्फ तमाशा होता रहा.

न गोताखोर समय पर मिले, न ही ठंडे पानी में उतरने का साहस किसी ने दिखाया. अंततः युवराज ने अपनी पिता की आंखों के सामने जलसमाधि ले ली. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, कड़ाके की ठंड और मौत के खौफ से युवराज को कार्डियक अरेस्ट हुआ था.

नोएडा प्राधिकरण की 6 बड़ी लापरवाहियां: जो बनीं मौत का कारण

खुला बेसमेंट: रिहायशी इलाके में मॉल के लिए 40 फीट गहरा गड्ढा बिना किसी कवर के महीनों से खुला छोड़ दिया गया.
संकेतों का अभाव: सड़क के उस तीखे मोड़ पर न तो कोई रिफ्लेक्टर था और न ही कोई चेतावनी बोर्ड.
बैरिकेडिंग की कमी: सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता कंक्रीट या लोहे की बैरिकेडिंग नहीं थी.
रेस्क्यू में सुस्ती: SDRF और NDRF की टीमें घंटों की देरी से गाजियाबाद से पहुंचीं. स्थानीय स्तर पर कोई तैयारी नहीं थी.
अंधेरा: सेक्टर-150 के उस मोड़ पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था न होने से कोहरे में गड्ढा दिखाई ही नहीं दिया.
पुरानी चेतावनियों को नजरअंदाज करना: 31 दिसंबर को भी इसी जगह एक ट्रक हादसा हुआ था, लेकिन प्राधिकरण ने तब भी सबक नहीं लिया.

अब तक की कार्रवाई: खानापूर्ति या इंसाफ?जनता के भारी आक्रोश और कैंडल मार्च के बाद प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम ने कुछ सख्त कदम उठाए हैं. ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर (JE) नवीन कुमार को तत्काल बर्खास्त कर दिया गया है. मृतक के पिता की शिकायत पर लोटस ग्रीन और अन्य बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. सेक्टर-150 के मॉनिटरिंग अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है.

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