60 साल का बुजुर्ग या 60 साल का जवान, आपने कई बार लोगों को ऐसा कहते हुए सुना होगा. लेकिन अब वैज्ञानिकों का दावा है कि 60 साल की उम्र को बुढ़ापा नहीं माना जा सकता. बुढ़ापे की इस नई परिभाषा को समझने के लिए आपको वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की इस रिपोर्ट को बेहद गौर से समझना चाहिए
इस रिपोर्ट में आकलन लगाया गया है कि वर्ष 2030 तक विकसित देशों में हर तीसरा बच्चा 100 साल की उम्र तक जिएगा. इसके हिसाब से 60 साल की उम्र मानव जीवन का मध्य हिस्सा मानी जाएगी ना कि अंतिम हिस्सा.
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80 साल के बाद ही आप होंगे बूढ़े
बुढ़ापे की नई परिभाषा के अनुसार, 80 से 85 साल की उम्र होने पर ही आप अपने जीवन के अंतिम स्तर यानी कि बुढ़ापे में होंगे. वैज्ञानिकों का ये भी आकलन है कि वर्ष 2030 तक विकसित देशों में रहने वाले 60 साल की उम्र के लोग 40 साल की उम्र जैसा जीवन जिएंगे. यानी उनके शरीर में 40 साल के व्यक्ति जैसी ऊर्जा होगी.
60 में जवां रहने का तरीका
इस रिपोर्ट के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति तनावपूर्ण जीवन जीता है तो 60 साल की उम्र में वो बुजुर्ग अवस्था में पहुंच जाएगा. लेकिन अगर कोई व्यक्ति तनाव से दूर रहता है, शराब और तंबाकू का सेवन नहीं करता और नियमित रूप से व्यायाम करता है, तो उसे 60 साल की उम्र में बुजुर्ग नहीं कहा जा सकता है.
शारीरिक अवस्था का उम्र से कोई संबंध नहीं
हमारी भारतीय परंपराओं में भी कहा गया है. अगर कोई व्यक्ति ध्यान, अध्यात्म और योग से जुड़ा रहता है तो वो मानसिक तनाव से बच सकता है. ऐसा करने से व्यक्ति की उम्र तो बढ़ेगी. लेकिन उसकी शारीरिक अवस्था बेहतर बनी रहेगी.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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