भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भारतीय टीम मैनेजमेंट को एक खिलाड़ी के साथ नाइंसाफी करने पर लताड़ लगाई है. सुनील गावस्कर ने रविचंद्रन अश्विन के साथ टीम मैनेजमेंट के व्यवहार पर नाराजगी जाहिर की है. सुनील गावस्कर ने भारतीय टीम मैनेजमेंट पर अनुभवी ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को टीम संतुलन के नाम पर दरकिनार करने का आरोप लगाया है. बता दें कि टीम इंडिया के सबसे बड़े मैच विनर्स में शुमार रहे रविचंद्रन अश्विन ने बीते बुधवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिसबेन टेस्ट के ड्रॉ होने के ठीक बाद संन्यास लेकर सभी को चौंका दिया था.
इस खिलाड़ी के लिए खड़े हुए गावस्कर
38 वर्षीय रविचंद्रन अश्विन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौजूदा बॉर्डर गावस्कर सीरीज के पहले तीन टेस्ट मैचों में से केवल एक में ही खेल पाए. भारत ने स्पिनर की जगह के लिए रोटेटिंग नीति अपनाई, जिसमें पर्थ में वॉशिंगटन सुंदर, एडिलेड में अश्विन और ब्रिसबेन में रवींद्र जडेजा को चुना गया. SENA (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) देशों के दौरे के लिए नियमित रूप से टीम में शामिल होने के बावजूद, अश्विन ने अपने 14 साल के करियर में इन परिस्थितियों में केवल 26 टेस्ट खेले हैं.
टीम मैनेजमेंट को लगाई लताड़
मिड डे के लिए अपने कॉलम में लिखते हुए सुनील गावस्कर ने कहा, ‘क्रिकेट बल्लेबाजों का खेल है, इसलिए उन्होंने हमेशा प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार जीता, लेकिन बल्लेबाजों के बीच उनकी कोई तारीफ नहीं हुई. जब भी उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं करने का 5 प्रतिशत भी बहाना होता था, तो टीम संतुलन के बहाने ऐसा किया जाता था.’ सुनील गावस्कर ने आगे सवाल उठाया कि विदेशी हालात में संघर्ष करने वाले बल्लेबाजों के लिए भी समान नियम क्यों नहीं लागू किए गए.
दुनिया के सामने खोल दी पोल
सुनील गावस्कर ने कहा, ‘घर पर, रविचंद्रन अश्विन को बाहर रखने का कोई तरीका नहीं था, क्योंकि टीम मैनेजमेंट जानता था कि उनके बिना, वे मैच नहीं जीत सकते. अगर बहाना यह था कि पिच और परिस्थितियां ICC के नंबर एक रैंक वाले गेंदबाज के अनुकूल नहीं होंगी, तो वही बहाना उन बल्लेबाजों के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल किया गया, भले ही वे ICC की टॉप रैंक वाले ही क्यों न हों, लेकिन जो समान पिचों और परिस्थितियों में संघर्ष करते हैं?’
अश्विन भारत के लिए एक बेहतरीन कप्तान
सुनील गावस्कर ने आगे कहा, ‘अश्विन भारत के लिए एक बेहतरीन कप्तान साबित हो सकते थे, लेकिन उन्हें उप-कप्तान बनने का सम्मान भी नहीं दिया गया. उन्हें यह सम्मान देने का एक मौका था, भले ही यह एक प्रतीकात्मक टेस्ट मैच और लिमिटेड ओवरों की बाइलेटरल सीरीज के लिए ही क्यों न होता, लेकिन उन्हें यह भी नहीं दिया गया. इसलिए यह देखना बहुत अच्छा था कि रोहित शर्मा ने उन्हें अपने 100वें टेस्ट मैच में टीम की कप्तानी करने के लिए कहा.’ 38 वर्षीय रविचंद्रन अश्विन ने 24 की औसत से 537 टेस्ट विकेट लेने के साथ ही छह शतकों सहित 3,503 रन बनाने का शानदार रिकॉर्ड बनाया. रविचंद्रन अश्विन ने वनडे में 156 और टी20 में 72 विकेट भी लिए हैं.
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