भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार को निधन हो गया. वह 92 साल के थे. डॉ. मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक लगातार दो बार भारत के प्रधानमंत्री रहे थे. डॉ. मनमोहन सिंह को 1991 के आर्थिक सुधारों का नेतृत्व करने का श्रेय दिया जाता है. मनमोहन सिंह ने भारत को एक गंभीर वित्तीय संकट से उबरने में मदद की. डॉ. मनमोहन सिंह की नीतियों ने आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की, जिसने बाद के दशकों में भारत के तेज आर्थिक विकास की नींव रखी. बता दें कि डॉ. मनमोहन सिंह को गुरुवार रात को गंभीर हालत में रात करीब साढ़े आठ बजे एमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था. एम्स ने बाद में एक बुलेटिन जारी करते हुए बताया कि मनमोहन सिंह को तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें होश में नहीं लाया जा सका और रात 9.51 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
मुंबई हमले के बाद आया 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप
साल 2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट रिश्ते खराब होने लगे. पाकिस्तान क्रिकेटर्स के आईपीएल खेलने पर बैन लगा दिया गया. इसके अलावा भारत के क्रिकेटर्स ने फिर कभी पाकिस्तान में जाकर कोई बाइलेट्रल क्रिकेट सीरीज भी नहीं खेली. हालांकि साल 2011 वर्ल्ड कप के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की क्रिकेट डिप्लोमेसी ने खूब चर्चा लूटी. 2011 वर्ल्ड कप की संयुक्त मेजबानी भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका ने मिलकर की थी. 2011 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत और पाकिस्तान के बीच मोहाली में हाईवोल्टेज मुकाबला खेला गया.
जब मनमोहन ने PAK पीएम के साथ बैठकर देखा सेमीफाइनल
भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने साथ बैठकर यह वर्ल्ड कप सेमीफाइनल मैच देखा था. पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की इस क्रिकेट डिप्लोमेसी की चर्चा आज भी होती है. भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी 30 मार्च 2011 को मोहाली के पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में भारत-पाक वर्ल्ड कप सेमीफाइनल के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों के साथ बातचीत करते हुए दिखाई दिए थे. एक अभूतपूर्व कदम के तहत तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने खुद पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम यूसुफ रजा गिलानी को मोहाली में मैच देखने के लिए निमंत्रण पत्र भेजा.
यूसुफ रजा गिलानी ने निमंत्रण को स्वीकार कर लिया
यूसुफ रजा गिलानी ने मनमोहन सिंह के इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया. 30 मार्च 2011 को एक अभूतपूर्व दृश्य देखा गया, जब डॉ. मनमोहन सिंह और यूसुफ रजा गिलानी ने साथ बैठकर दो कट्टर प्रतिद्वंद्वियों के बीच प्रतिष्ठित सेमीफाइनल मैच देखा. इस मैच में भारत ने 29 रनों से जीत दर्ज की. मोहाली में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट खोकर 260 रन बनाए. पाकिस्तान की टीम जवाब में 231 रनों पर ही ढेर हो गई. इस मुकाबले में भी तेंदुलकर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 85 रनों की पारी खेली और ‘मैन ऑफ द मैच’ चुने गए. 2011 वनडे वर्ल्ड कप के दौरान पाकिस्तान ने अपने सभी ग्रुप स्टेज और क्वार्टर फाइनल मैच श्रीलंका या बांग्लादेश में खेले थे. हालांकि, जब पाकिस्तान ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया, तो उन्हें आतंकवादी हमले के बाद पहली बार भारत की यात्रा करनी थी. वास्तव में भारत तब मोहाली के पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) स्टेडियम में पाकिस्तान के खिलाफ बहुप्रतीक्षित सेमीफाइनल मुकाबले के लिए तैयार था.
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