Uttar Pradesh

मशीन नहीं, आज भी इस देशी जुगाड़ से होती है अनाज की सफाई, बंपर है डिमांड, जानिए कैसे होता है तैयार?

Last Updated:May 06, 2025, 09:38 ISTAgriculture News: फर्रुखाबाद के कारीगर दशकों से कुश की टहनियों से सूप बनाते आ रहे हैं. आधुनिकता के बावजूद इनकी मांग बनी हुई है. सूप का उपयोग अनाज साफ करने और दरिद्रता भगाने के लिए होता है.X

कुश से सूप बनाते कारीगर.हाइलाइट्सफर्रुखाबाद के कारीगर दशकों से कुश की टहनियों से सूप बनाते आ रहे हैं.आधुनिकता के बावजूद कुश के सूप की मांग बनी हुई है.सूप का उपयोग अनाज साफ करने और दरिद्रता भगाने के लिए होता है.

सत्यम कटियार/फर्रुखाबाद: ग्रामीणी क्षेत्रों में आज भी जब खेत खलिहाल से अनाज घर आता है, तो कोई और बड़ी मशीन नहीं बल्कि लकड़ी से बने हुए सूप का प्रयोग किया जाता है. प्राचीन समय से ही अनाज साफ करने से लेकर शादी विवाह और मांगलिक कार्यक्रमों में सूप का प्रयोग होता आ रहा है. यह सभी ग्रामीण घरों में मौजूद होता है. जी हां पतेल यानी कि कुश के बीच से निकलने वाली पतली पतली टहनियों को तराशकर सूप  तैयार किया जाता है.  फर्रुखाबाद के कारीगर कई दशकों से इन्हें बनाने का कार्य करते आ रहे हैं.

आज के समय में भी तगड़ी है सूप डिमांड

लोकल18 को कारीगर शाकिर ने बताया कि आधुनिकता के इस दौर में जहां एक ओर स्टील से बने हुए सूप बाजार में आ गए हैं. ऐसे समय में भी कुश के सूप की डिमांड काफी है. इसके साथ ही  अनाज को साफ करने के लिए आज भी उनका प्रयोग होता आ रहा है. वहीं वह इससे अच्छी कमाई  कर लेते हैं.

कैसे होते है यह तैयार 

बारिश के मौसम के बाद बलुई भूमि पर उगने वाली पतेल यानी कि कुश से निकलने वाले फूलों की यह टहनियों होती हैं. जिनको यह कारीगर चुनने के बाद पानी से भीगाकर कोमल बनाते हैं. फिर हाथों से शुरू होती है इसकी बुनाई. इसके बाद  होती है कटिंग और इसके बाद इनको तराशते हुए  दिया जाता है सूप का आकार.

 सूप बजाकर घर से निकाली जाती है दरिद्रता

मान्यता है कि कुश की सूप बजाकर घरों से दरिद्र को बाहर खदेड़ा जाता है. सुबह चार बजे महिलाएं घर को दरिद्रता से दूर रखने के लिए कुश के सूप को घर के कोने-कोने में बजाते हैं. यह सदियों से चल आ रही परंपरा है. जिसमें सूप बजाकर दरिद्र भगाने का संबंध हिन्दू धर्म में सुख समृद्धि से जोड़ा गया है. वहीं शास्त्रों में वर्णित श्लोक -शेष रात्रौ दरिद्रा निहिषार्णम, हमारी विशिष्ट परंपरा का बोध कराता है.
Location :Farrukhabad,Uttar Pradeshhomeagricultureमशीन नहीं, आज भी इस देशी जुगाड़ से होती है अनाज की सफाई, बंपर है डिमांड

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