Uttar Pradesh

मूर्ति को गंगा के किनारे फेंका तो आ गया भूचाल! बेहद रोचक है मंगला भवानी का इतिहास



सनन्दन उपाध्याय/बलिया: नवरात्र शुरू होते ही मां मंगला भवानी के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ करने लगी है. सबका मंगल करने वाली मंगला भवानी का इतिहास भी बड़ा रोचक है. कहा जाता है कि इस सच्चे दरबार की कहानी ब्रिटिश शासन से जुड़ी हुई है. मान्यता है कि यहां आने वाले हर भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती है. ब्रिटिश शासक ने एक बार इस मूर्ति को गंगा के किनारे फेंकवा दिया था. इसके बाद उसका सर्वनाश होने लगा. अंततः उस विग्रह मूर्ति को लाकर स्थापित करने के बाद ही उस ब्रिटिश शासन को शांती मिली.

यह माता का दरबार शक्तिपीठों में से एक है. इसी माता का आराधना करके भगवान श्री राम ने तड़का का वध किया था. मंदिर के पुजारी शुभचिंतक पांडेय ने कहा, ‘मैं इस मंदिर पर पांचवें पीढ़ी पर हूं. यह शक्तिपीठों में से एक है. इसी माता का आराधना भगवान श्री राम करके ताड़का का वध किए थे. यहां भक्तों की हर मुरादे माता पूरी करती हैं. आज तक जो इस दरबार में आया वह खाली नहीं गया. माता ने हर भक्तों की झोली भर दी’.

ब्रिटिश शासक से जुड़ी है माता की कहानी…मां मंगला भवानी की कहानी एक ब्रिटिश शासन से जुड़ी है. पुजारी बताते हैं कि पहले यह मंदिर छोटे में और खुले में था. लाल चुनरी और सिंदूर देखकर अंग्रेजों के घोड़े भड़कते थे. जब इसकी जानकारी अंग्रेज शासक को हुई तो उसने माता के प्रतिमा को ही उखाड़ कर गंगा नदी के किनारे फेंकवा दिया. उसके बाद अस्तबल से घोड़े मरने लगे ब्रिटिश शासन के दो पुत्र भी मर गए. उसके बाद ब्रिटिश शासन को सपने में मां ने दर्शन देते हुए कहा कि अगर तुम इस वर्तमान सर्वनाश से बचना चाहते हो तो मेरे प्रतिमा को जहां से क्षति पहुंचाए हो वहां स्थापित कर दो. अंततः ब्रिटिश शासन के द्वारा काफी प्रयास के बाद मां के प्रतिमा का विग्रह प्राप्त हुआ. जिसे लाकर मंदिर में रखवाया. उसके बाद पुजारियो ने माता के प्रतिमा को स्थापित कर पुनः प्राण प्रतिष्ठा किया. तब से लेकर आज तक यह मां लाखों लोगों के आस्था का केंद्र बनी हुई है. यह माता का विग्रह लगभग 180 वर्ष पहले मिला था.

इसी मां का आराधना कर श्री राम ने किया ताड़का वध…भगवान श्री राम कारों के कामेश्वर धाम से जब चले तो इस स्थान पर आते-आते भोर हो गया. उसी के कारण इस क्षेत्र का नाम उजियार भरौली पड़ा. क्योंकि भगवान बड़े दुविधा में थे अस्त्र उठाना नहीं चाहते थे. तो उन्होंने यही माता का आराधना किया और माता ने रक्तबीज के वृत्तांत को सुना कर भगवान श्री राम के दुविधा को दूर किया. उन्होंने बताया कि समय के अनुसार अस्त्र उठना भी आवश्यक होता है. ऐसे ही दुविधा में मैं भी एक बार थी. अंततः वह दुविधा अस्त्र उठाने के बाद रक्तबीज के वध से समाप्त हुई. यह सच्चा दरबार शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. यह मंदिर काफी प्राचीन भगवान श्री राम के समय का है.

ये बोले मंदिर में आए तमाम श्रद्धालु…मंदिर में पूजा अर्चना करने आए तमाम श्रद्धालुओं(मनीषा कुमारी, सत्या सिंह और मनोज कुमार राय) ने कहा कि माता की महिमा अपरंपार है. यहां आने के बाद हर किसी की मनोकामनाओं को माता जरूर पूरा करती हैं. जो भी इस सच्चे दरबार में आया वह खाली नहीं गया. माता ने हर किसी की झोली भर दी. तमाम श्रद्धालु ऐसे मिले जिसमें से किसी को शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ावा, किसी को संतान की प्राप्ति तो किसी को धन, वैभव और घर में सुख शांति इस दरबार में आने के बाद प्राप्त हुई है.
.Tags: Hindu Temple, Local18FIRST PUBLISHED : October 17, 2023, 09:34 IST



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