बाराबंकी में किसान शिमला मिर्च की ओर रुख कर रहे हैं
बाराबंकी में किसान पारंपरिक खेती को छोड़कर शिमला मिर्च की ओर रुख कर रहे हैं। इसे देखने के लिए बड़ेल गांव के युवा किसान अनुज यादव की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। अनुज यादव डेढ़ बीघे में मल्च तकनीक से शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं और एक फसल पर 70 से 80 हजार रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं।
कम लागत और सालभर मांग ने इसे लाभकारी बना दिया है। मल्च तकनीक से खेती करने से किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन मिलता है। इसके अलावा, शिमला मिर्च की मांग सालभर रहती है, जिससे किसानों को निरंतर आय मिलती है। 60–70 दिन में तैयार होने वाली शिमला मिर्च की फसल किसानों को तेजी से लाभ प्रदान करती है।
अनुज यादव की सफलता को देखकर अन्य किसान भी शिमला मिर्च की खेती करने का फैसला कर रहे हैं। उनकी कहानी एक प्रेरणा है कि कैसे पारंपरिक खेती को छोड़कर नए अनुभवों की ओर बढ़ने से किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है।

