महाराष्ट्र के कोहलापुर की रहने वाली 16 वर्षीय रुतुजा गुरव ने हाल ही में बिहार में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में इतिहास रच दिया है. रुतुजा गुरव ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में अंडर-17 लड़कियों के 46 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है. बता दें कि यह जीत सिर्फ रुतुजा गुरव की ही नहीं, बल्कि उनके पिता की भी है. रुतुजा गुरव के पिता ने वर्षों की कड़ी मेहनत, संघर्ष और विश्वास के दम पर अपनी बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने में मदद की है.
मजदूर पिता की बेटी ने जीता गोल्ड
रुतुजा गुरव के पिता एक कंस्ट्रक्शन मजदूर हैं, जो लगभग 15,000 रुपये प्रति माह कमाते हैं. रुतुजा गुरव की मां एक किराने की दुकान में 6,000 प्रति माह की आय में नौकरी करती हैं. रुतुजा गुरव ने परिवार की खराब आर्थिक हालत के बावजूद महज 16 साल की उम्र में खूब नाम कमाया है. रुतुजा गुरव की एक बड़ी बहन भी हैं, जो लॉ की छात्रा हैं. माता और पिता की कुल मिलाकर 21,000 रुपये की आय में रुतुजा गुरव के चार सदस्यीय परिवार का गुजारा होता है.
दंगल जैसी फिल्मी है कहानी
रुतुजा गुरव सिर्फ आठ साल की थीं, जब उनके पिता महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में उनके गांव पंचगांव से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित एक कुश्ती अकादमी में ले गए. अगले छह महीनों तक उनकी बेटी इस खेल को अपनाने में झिझकती रही, लेकिन असली प्रेरणा तब मिली जब रुतुजा गुरव के पिता ने उन्हें आमिर खान की फिल्म दंगल दिखाई. कुश्ती पर आधारित इस फिल्म से रुतुजा गुरव को प्रेरणा मिली और उन्होंने तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा. पिछले आठ वर्षों में रुतुजा गुरव ने खुद को पूरी तरह से कुश्ती के लिए समर्पित कर दिया. रुतुजा गुरव के पिता भी चट्टान की तरह हमेशा उनके साथ खड़े रहे.
‘परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है’
अपने पहले खेलो इंडिया यूथ गेम्स में भाग लेने वाली रुतुजा गुरव की लंबाई पांच फीट से थोड़ी ज्यादा है. रुतुजा गुरव पोडियम पर पहुंचने को लेकर आश्वस्त थीं. रुतुजा गुरव के पिता संतोष ने कहा, ‘कभी-कभी परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है, बहुत सारे खर्च होते हैं. मैं आमतौर पर कुछ अतिरिक्त पैसे कमाने के लिए दिन में 12 घंटे काम करता हूं, कभी-कभी ओवरटाइम भी करता हूं, लेकिन मैं सुनिश्चित करता हूं कि मैं उसकी कोई भी प्रतियोगिता मिस न करूं, इसलिए उन दिनों कोई आय नहीं होती.’
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