Uttar Pradesh

मिर्जापुर के 200 साल पुराने बर्तन कारोबार ने भरी उड़ान, विदेशों तक हो रही डिमांड, जानिए खासियत

Last Updated:January 05, 2026, 09:08 ISTMirzapur News: कभी मिर्जापुर के पीतल बर्तनों की देशभर में पहचान थी. समय के साथ मांग घटी, लेकिन जीआई टैग मिलने से कारोबार में नई उम्मीद जगी है. इससे विदेशों में पहचान बढ़ी है. आर्थिक मदद और आधुनिक प्रशिक्षण मिलने पर यह पारंपरिक उद्योग फिर मजबूत हो सकता है.मिर्जापुर : कभी मिर्जापुर के पीतल के बर्तनों की डिमांड देशभर रहती थी. अलग-अलग बर्तनों की मांग राज्य के अनुसार रहती थी. हालांकि, बदलते समय के साथ ही बर्तनों की मांग कम हो गई. अब जीआई टैग मिलने के बाद एक बार फिर कारोबार के जीवित होने को लेकर उम्मीद दिख रही है. व्यवसाइयों का कहना है कि जीआई टैग मिलने के बाद विदेशों में बर्तनों को पहचान मिली है. इससे उत्पाद में असली और नकली का संशय नहीं रहता है. अगर व्यवसाइयों को थोड़ी आर्थिक मदद मिल जाए तो व्यवसाय के दिन बहुरेंगे. मिर्जापुर में पीतल व तांबा से कटोरी, चम्मच, गिलास, परात, थार, अलग-अलग सजावटी व पूजा से जुड़े सामान तैयार होते हैं.

मिर्जापुर पीतल बर्तन मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष हरिओम सिंह ने लोकल 18 से बताया कि पीतल का कारोबार 200 साल पुराना है. गजेटियर से हम लोगों को जानकारी प्राप्त होती है. व्यवसाय से जुड़े हमारे पूर्वजों के द्वारा भी यह जानकारी हमें लोगों को दी गई है. उन्होंने भी बताया है कि 200 सालों से पुराना है. जीआई टैग मिलने के बाद से हमें विदेशों में माल की बिक्री का मौका मिला है. जीआई प्रोडक्ट बनने के बाद यहां के पीतल के बर्तनों की विश्वसनीयता बढ़ गई है. इससे ग्राहकों को पता चलता है कि यहां का उत्पाद है. यह असली होने की पहचान है. यहां पर तांबा और पीतल के मिश्रण से बर्तन तैयार होते हैं. पीतल के बर्तन

शादी और विवाह में बची हुई है डिमांड

हरिओम सिंह ने बताया कि एक समय में बर्तनों की डिमांड विदेशों में थी. हालांकि, बदलते समय के साथ ही मांग कम हो गई. सरकार की उदासीनता से यह कारोबार हमारे गृह जनपद से विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया. अब इसकी डिमांड महज कुछ राज्यों तक सीमित है. शादी-विवाह के सीजन में परम्परा के तहत इन बर्तनों को दिया जाता है, जिससे डिमांड थोड़ी रहती है. बाकी दिनों में व्यवसाय बेहद ही मंदा रहता है. मजदूरों को काम भी नहीं मिलता है.

जीआई टैग के बाद बढ़ गई डिमांड

हरिओम सिंह ने बताया कि सरकार ने जीआई और ओडीओपी (एक शहर एक उत्पाद) के तहत इसे प्रमोट कर रही है. हालांकि, व्यवसाइयों को फाइनेंशियल मदद नहीं मिल रही है. अच्छे ट्रेनर भी नहीं मिल रहे हैं. जो भी व्यवसाय चल रहा है. यह पुराने तरीकों से हो रहा है. नए दौर की मांग और टेक्नोलॉजी आधरित काम में हमारे वर्कर काफी पीछे हैं.

स्वास्थ्य के लिए है बेहद ही फायदेमंद

हरिओम सिंह ने बताया कि यह स्वास्थ्य के लिए बेहद ही फायदेमंद है. पीतल और तांबा के बर्तन में पानी और खाना खाने से हमारे लिवर को फायदा पहुंचता है. हमारा किडनी अच्छा रहता है. पल्स भी अच्छा रहेगा. ब्लडप्रेशर से लेकर नसों से जुड़ी दिक्कतों में लाभ पहुंचाता है. पाचन तंत्र के लिए यह गुणकारी है.About the AuthorLalit Bhattपिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ेंLocation :Mirzapur,Uttar PradeshFirst Published :January 05, 2026, 09:08 ISThomeuttar-pradeshमिर्जापुर के 200 साल पुराने बर्तन कारोबार ने भरी उड़ान, विदेशों तक डिमांड

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