Uttar Pradesh

‘महंगाई 7.5 प्रतिशत तो वेतन में 3.5 की बढ़ोतरी क्यों नहीं?’ 8वें वेतन आयोग को लेकर बोले गाजीपुर के प्रोफेसर्स

गाजीपुर: केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सुगबुगाहट तेज होते ही देशभर के सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों में उम्मीदें जग गई हैं. हाल ही में आयोग के लिए फीडबैक प्रक्रिया शुरू होने और आधिकारिक पोर्टल लॉन्च होने के बाद अब बहस का मुख्य केंद्र ‘फिटमेंट फैक्टर’ और पुरानी पेंशन बन गया है. इस मुद्दे पर गाजीपुर के प्रतिष्ठित पीजी कॉलेज के प्रोफेसरों ने अपनी बेबाक राय साझा की है.

महंगाई बनाम वेतन: 3.5 फिटमेंट फैक्टर की मांग

बॉटनी विभाग के प्रोफेसर डॉ. इंदीवर रतन पाठक का कहना है कि पिछले वेतन आयोगों की तरह इस बार भी लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने तर्क दिया कि 20 साल के अंतराल में महंगाई जिस तेजी से बढ़ती है, उसी अनुपात में वेतन भी बढ़ना चाहिए. डॉ. पाठक ने पिछली बार के 2.7 फिटमेंट फैक्टर का जिक्र करते हुए यूजीसी के अंतर्गत सेवा शर्तों में और भी बेहतर सुधार की उम्मीद जताई.

वहीं, माइक्रोबायोलॉजी के डॉ. योगेश कुमार ने आर्थिक स्थिरता पर जोर देते हुए कहा, ‘वर्तमान में इन्फ्लेशन रेट (मुद्रास्फीति) लगभग 7.5% है, इसलिए वेतन वृद्धि ऐसी होनी चाहिए, जो महंगाई को मात दे सके.’ उन्होंने 3.0 से 3.5 फिटमेंट फैक्टर की मांग करते हुए कहा कि एक ‘हैंडसम सैलरी’ मिलने से शिक्षक मानसिक रूप से स्थिर होगा, जिससे वह राष्ट्र निर्माण में बेहतर योगदान दे पाएगा.

रिटायर्ड शिक्षकों की पीड़ा: पेंशन में सुधार जरूरी

सेवानिवृत्त प्रोफेसर संजय कुमार राय ने शिक्षा की गुणवत्ता को शिक्षक की संतुष्टि से जोड़ा. उन्होंने कहा, ‘शिक्षक आर्थिक रूप से संतुष्ट होगा, तभी सही शिक्षा दे पाएगा.’ एक पेंशनभोगी के तौर पर उन्होंने दुख जताया कि वर्तमान पेंशन से बुनियादी जरूरतें पूरी करना मुश्किल है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस आयोग में रिटायर्ड शिक्षकों के लिए विशेष सुधार किए जाएं.

संवैधानिक हक और पुरानी पेंशन (OPS) का मुद्दा

इंग्लिश के प्रोफेसर डॉ. रामनारायण तिवारी ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि काम के बदले उचित वेतन बढ़ाना बराबरी का हक है. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जहां मंत्री और सांसद अपना वेतन खुद बढ़ा लेते हैं, वहीं कर्मचारियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है.

हिंदी विभाग के डॉ. राकेश पांडे और जूलॉजी की प्रोफेसर डॉ. रागिनी अहिरवार ने पुरानी पेंशन (OPS) बहाली को सबसे मुख्य मुद्दा बताया. डॉ. पांडे ने भावुक होते हुए कहा, ‘हम पूरी जवानी शिक्षण और सरकारी कार्यों में लगा देते हैं, लेकिन रिटायर होने पर नाममात्र की पेंशन दी जाती है. सरकार को इसे फिर से चालू करना चाहिए.’

आर्थिक संपन्नता से राष्ट्र का विकास

इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर विजय कुमार सिंह ने बेसिक-पे में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन और वेतन में सुधार से महंगाई का असर कम होगा. सभी प्रोफेसरों का सामूहिक मत था कि शिक्षक देश चलाने वाले लोग हैं. जब तक वे आर्थिक रूप से संपन्न नहीं होंगे, तब तक शिक्षा का स्तर और राष्ट्र की प्रेरणा का तालमेल सही नहीं बैठेगा.

क्या है 8वें वेतन आयोग की ताजा स्थिति?

आधिकारिक पोर्टल: सरकार ने 8cpc.gov.in लाइव कर दिया है.सुझाव की अंतिम तिथि: कर्मचारी और पेंशनभोगी 16 मार्च 2026 तक MyGov पर 18 सवालों की प्रश्नावली के जरिए अपनी राय दे सकते हैं.वेतन वृद्धि के कयास: चर्चा है कि न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए से बढ़कर 35,000-41,000 रुपए के बीच हो सकता है.

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