प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ मेला-2025 को दिव्य और भव्य बनाने की तैयारी में मेला प्रशासन युद्धस्तर पर जुटा है. अखाड़ों का भूमि पूजन के बाद धर्मध्वजा स्थापना क्रम जारी है. वैष्णव सम्प्रदाय के तीनों अखाड़े पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा, पंच निर्मोही अनी अखाड़ा और पंच निर्वाणी अनी अखाड़े की धर्मध्वजा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शनिवार को संगम में स्थापित की गई. धर्म ध्वजा स्थापित होने के बाद तीनों अखाड़ों की पेशवाई यानी छावनी प्रवेश होगा.क्या होती है मान्यताधर्मध्वजा स्थापना का मतलब जैसे कि सभी कार्यों की संपन्नता के लिये पहले पूजा अर्चना की जाती है उसी तरह साधु संतों के द्वारा धर्म ध्वज की स्थापना की जाती है. धर्मध्वजा एक प्रतीक है जो इष्टदेव को समर्पित होता है. लोकल 18 से बात करते हुए पांच निर्मोही अनी अखाड़े के सन्त महंत राजेंद्र दास ने कहा की धर्म ध्वज पर स्वयं हनुमान जी विराजमान होंगे जिनके नेतृत्व में ही वैष्णो संप्रदाय के अखाड़े की शुरुआत हो रही है.महंत राजेंद्र दास ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तथा शासन प्रशासन के सहयोग से इस बार व्यवस्था सर्वोपरि है. सभी साधु संत मिलकर भव्य और दिव्य मेले की शुरुआत कर रहे हैं. इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय संत रामजानकी ट्रस्टी देवेंद्र दास जी महाराज, दुर्गा दास जी महाराज और अन्य संत बड़ी संख्या में धर्म ध्वज स्थापना के कार्यक्रम में सम्मिलित हुए. साधु संतों ने कहा कि अंधेरे से प्रकाश की ओर अगर जाना है तो महाकुंभ मेले में पधार कर पुण्य की प्राप्ति करें.सनातन धर्म में कितने हैं अखाड़ेसनातन धर्म में कुल 13 प्रमुख अखाड़े हैं जिसमें देश का सबसे बड़ा अखाड़ा जूना अखाड़ा है जो शैव सम्प्रदाय से जुड़ा हुआ है. शैव संप्रदाय के कुल सात अखाड़े हैं. उदासीन परंपरा के तीन अखाड़े हैं जबकि वैष्णों संप्रदाय से जुड़े तीन अखाड़े हैं. जहां शैव संप्रदाय से जुड़े अखाड़े हर-हर महादेव के नारे से गूंजते हैं तो वहीं वैष्णों अखाड़े के लोग जय श्री राम का परचम बुलंद करते हैं.FIRST PUBLISHED : December 28, 2024, 23:53 IST
Civil Supplies Services Must Be Expanded: Manohar
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