महराजगंज का दर्जानिया ताल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और मगरमच्छ संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है. दूर-दूर से पर्यटक यहां पहुंचते हैं, लेकिन ऊंचे टिकट दाम और बुनियादी सुविधाओं की कमी निराश करती है. बैठने, साफ-सफाई, शौचालय और गाइड जैसी व्यवस्था न होने से लोग असंतुष्ट लौटते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सुविधाएं बढ़ें तो यह बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता है. महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र के सीमावर्ती क्षेत्र में जिले के सबसे बड़े पर्यटन स्थलों में से एक दर्जनिया मगरमच्छ संरक्षण केंद्र है, जहां पर चार से भी ज्यादा मगरमच्छों का संरक्षण किया जाता है. यह पर्यटन स्थल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और मगरमच्छों के संरक्षण के नियमों के लिए प्रसिद्ध है. इसके साथ ही यह मगरमच्छों का लाल पर्यटन के लिए भी एक महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है. एक समय ऐसा था जब यहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए और प्रकृति का आनंद लेने के लिए पहुंचते थे, जहां उन्हें शांत जल, हरे-भरे मैदान और जंगलों का क्षेत्र और भी आकर्षित करता था. हालांकि अब यहां आने वाले पर्यटकों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
पर्यटकों की उम्मीद पर फिर रहा पानी महराजगंज जिले के सबसे बड़े पर्यटन स्थलों में से एक दर्जनिया मगरमच्छ संरक्षण केंद्र पर पर्यटन के लिए आने वाले लोगों को किसी तरह की कोई सुविधा नहीं मिलती है. यहां पर किसी तरह की कोई सुविधा देखने को नहीं मिलती, न तो यहां बैठने की कोई व्यवस्था है और न ही कोई अन्य सुविधा उपलब्ध है. सबसे बड़ी शिकायत पर्यटकों की यह रहती है कि वे प्रवेश टिकट लेकर घूमने के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें कोई सुविधा नहीं मिलती. जिस हिसाब से इस पर्यटन स्थल का टिकट है, उसके अनुसार यहां सुविधाओं का बहुत ही अभाव है, जिसकी वजह से यहां आने वाले पर्यटकों की उम्मीद पर पानी फिर जाता है. दर्जनिया ताल में मगरमच्छों को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है. यहां पर न तो बैठने की कोई व्यवस्था है और न ही साफ-सफाई देखने को मिलती है.
पर्यटकों के लिए नहीं है कोई उचित व्यवस्था महराजगंज के दर्जनिया मगरमच्छ संरक्षण केंद्र पर घूमने के लिए आए एक पर्यटक ने बताया कि उनके प्रवेश के लिए ₹50 का शुल्क लिया गया, लेकिन उन्हें किसी तरह की कोई सुविधा नहीं मिली. न ही यहां पर घूमने के लिए कोई उचित व्यवस्था है और न ही किसी तरह की साफ-सफाई देखने को मिलती है. यहां पर एक अटारी बनाई गई है, जिस पर चढ़कर पर्यटक मगरमच्छों की गतिविधियों को देख सकते हैं, लेकिन इसकी सुविधा भी इतनी अच्छी नहीं है कि मगरमच्छों की गतिविधियों को आसानी से देखा जा सके. वहीं, एक अन्य पर्यटक ने बताया कि यहां किसी तरह की सुविधा नहीं है जिससे वे यहां पर मजा ले सकें और मगरमच्छ संरक्षण केंद्र का पूरा आनंद ले सकें. स्थानीय लोगों का कहना है कि सुविधाएं बढ़ें तो यह बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता है.

