Mental Health: हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सारा अली खान, धनुष और अक्षय कुमार-स्टारर फिल्म ‘अतरंगी रे’ रिलीज हुई है. जिसमें एक मानसिक बीमारी को मुख्य रूप से पेश किया गया है. इस मूवी की होरोइन सारा अली खान एक मानसिक रोग से पीड़ित दिखाई गई हैं, जिसका नाम है (Post Traumatic Stress Disorder) पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर. फिल्म में इस मानसिक बीमारी से पीड़ित सारा की कल्पना में ही एक शख्स है, जिससे वो बहुत प्यार करती है, लेकिन असल जिंदगी में वैसा ही कोई आदमी होती ही नहीं है.
इस खबर में हम इसी मानसिक बीमारी के बारे में खुलकर जानते हैं.
पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर क्या है?पोस्ट-ट्रोमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) एक मेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति अपने साथ घटी या देखी गई घटनाओं पर वर्तमान में प्रतिक्रया देता है. इस बीमारी में रोगी किसी बुरी घटना को भूल नहीं पाता और उसको ही लगातार अनुभव करता रहता है.
पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर क्यों होता है?एक वेबसाइट में छपी खबर के अनुसार, साइकेट्रिस्ट डॉ. संदीप वोहरा कहते हैं कि कोई भी इंसान इस बीमारी का तभी होता है, जब वो किसी गहरे सदमें में हो. उसने आंखों के सामने कोई बड़ा हादसा देखा होगा. जब भी बुरी घटनाएं, जीवन में अचानक घटती हैं और व्यक्ति को हक्का-बक्का कर देती हैं, ऐसी स्थिति से जूझने वाला व्यक्ति इस डिसऑर्डर का शिकार हो सकता है.
महिलाओं को ज्यादा खतरा!डॉ. संदीप वोहरा की मानें तो महिलाएं पुरुषों से ज्यादा सेंसिटिव और इमोशनल होती हैं, इसलिए किसी दुर्घटना का उनकी आंखों के सामने अचानक होना उनमें पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर पैदा कर देता है. यही वजह है कि महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले ये डिसऑर्डर ज्यादा देखने को मिलता है.
पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के लक्षण (Symptoms of Post Traumatic Stress Disorder)
बुरे सपने आना.
चीजों को याद रखने में परेशानी.
चिड़चिड़ापन.
भूख, प्यास और नींद की कमी.
ध्यान केंद्री करने में पेरशानी.
घबराहट और एंग्जायटी के लक्षण दिख सकते हैं.
व्यक्ति स्ट्रेस में रहता है.
व्यक्ति को वो घटना बार-बार याद आती है.
इस बीमारी का इलाज क्या है?पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि इसकी पहचान जितनी जल्दी होगा, ट्रीटमेंट उतना ही जल्दी शुरू होगा. इसके साथ ही पेशेंट को मिलने वाला सोशल सपोर्ट, उसकी फैमिली लाइफ भी उसके ट्रीटमेंट के लिए मायने रखती है. रोगी किसी तरह के नशा का आदी न हो और सही समय पर डॉक्टर से इलाज कराने पर वो जल्दी ठीक हो सकता है. इस बीमारी का इलाज मनोवैज्ञानिक द्वारा ही किया जा सकता है. इस बीमारी के मरीजो को काउंसलिंग, हिप्नोसिस और दवाइयों का सहारा लेना पड़ता है.
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यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.
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