संजय यादव/बाराबंकी. जिले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले देवा मेला का रंग इस बार फीका पड़ गया है. अनुमान लगाया जा रहा था कि इस बार का देवा मेला जबरदस्त होगा, लेकिन इसके उलट मेले में आए व्यापारियों को मायूसी हाथ लगी है. एक तरफ मेला परिसर में कई सालों के मुकाबले 60 प्रतिशत भीड़ कम रही, वहीं मेले में लगने वाला प्रसिद्ध घोड़ा बाजार समापन से 5 दिन पहले ही उजड़ने लगा है.मंडी में देखने पर अब 100 से 150 घोड़े ही रह गए हैं और वो भी इसलिए क्योंकि जो व्यापारी और किसान अच्छी कीमत मिलने की आशा लिए हजारों रुपए ट्रांसपोर्ट पर खर्च करके आए थे, अब उनके पास अपने घोड़ों को वापस ले जाने के लिए पैसे नहीं हैं. देवा घोड़ा मंडी में पशु बिक्री का आंकड़ा इस बार पिछले 10 सालो में सबसे खराब रहा. मंडी में बचे व्यापारियों की मानें तो इस बार सिर्फ 400 से 500 घोड़े ही बिके, जबकि पिछले साल भारी बारिश होने के बावजूद ये आंकड़ा 3000 के पार था.घोड़े नहीं बिकने से व्यापारी मायूसकई व्यापारियों का कहना था कि घोड़ा बाजार की इतनी खराब हालत उन्होंने अपनी पूरे जीवन में कभी नहीं देखी. इस बार आधे से ज्यादा व्यापारी अभी तक मेले की मंडी में नहीं पहुंचे हैं, जिसके कारण खरीदार भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं. घोड़े विक्रेताओं ने बताया हम लोग देवा मेले में बेचने के लिए घोड़े लेकर के आए थे. अभी तक एक भी घोड़ा बिक नहीं पाया है. इस बार ग्राहक नहीं आ रहे हैं, न तो किसान आए हैं. इस बार मेले की स्थिति गड़बड़ है. हम लोगों के पास अब पैसे भी नहीं हैं कि वापस जा सकें..FIRST PUBLISHED : November 5, 2023, 24:23 IST
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