Uttar Pradesh

Makar Sankranti will be celebrated on January 15th for the next 55 years, here’s the astrological reason. Find out when the date has changed.

Last Updated:January 13, 2026, 21:41 ISTMakar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति का पर्व दशकों से 14 जनवरी को मनाया जाता रहा है और लोगों के मन में यह तारीख पूरी तरह रच-बस चुकी है. लेकिन अब इस परंपरा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. खगोलीय और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अगले 55 वर्षों तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी. इसके पीछे सूर्य की गति और राशि परिवर्तन का विशेष कारण है.मिर्जापुर: मिर्जापुर समेत पूरे देश में मकर संक्रांति लंबे समय तक 14 जनवरी को मनाई जाती रही है. वर्ष 1936 से लेकर 2008 तक यह पर्व लगातार इसी तिथि पर मनाया गया. इस दौरान 72 वर्षों की अवधि पूरी हुई. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 72 वर्षों में सूर्य अपनी गति के अनुसार एक दिन का अंतर पूरा कर लेता है. हर वर्ष सूर्य की गति लगभग 20 मिनट धीमी होती जाती है, जिसके कारण संक्रांति की तिथि धीरे-धीरे आगे बढ़ती जाती है.

सूर्य की गति से तय होता है पर्वविंध्यधाम के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य अखिलेश अग्रहरि के अनुसार मकर संक्रांति पूरी तरह सूर्य पर आधारित पर्व है. जिस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, उसी दिन मकर संक्रांति मानी जाती है. सूर्य कभी वक्री नहीं होता, वह हमेशा मार्गी रहता है. इसी वजह से उसकी गणना को सबसे अधिक सटीक माना जाता है. सूर्य की धीमी गति के कारण अब उसका मकर राशि में प्रवेश देर से हो रहा है.

कब होगा सूर्य का राशि परिवर्तनज्योतिषाचार्य अखिलेश अग्रहरि ने बताया कि वर्ष 2026 तक सूर्य मकर राशि में सूर्योदय के बाद प्रवेश कर रहा है. सनातन धर्म में किसी भी पर्व का निर्धारण सूर्योदय के आधार पर किया जाता है. इस कारण भले ही सूर्य 14 जनवरी को राशि परिवर्तन करे, लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा. इसी दिन खरमास भी समाप्त होगा, जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत संभव हो सकेगी.

अब 55 साल तक नहीं बदलेगी तारीखज्योतिष गणनाओं के अनुसार अब अगले 55 वर्षों तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी. 2008 के बाद से यह पर्व कभी 14 तो कभी 15 जनवरी को मनाया जाता रहा है, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति बनी रहती थी. लेकिन अब खगोलीय और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले कई दशकों तक तारीख स्थिर रहेगी.

इतिहास में बदलती रही है संक्रांति की तिथिइतिहास पर नजर डालें तो मकर संक्रांति की तारीख हमेशा एक जैसी नहीं रही है. वर्ष 1792 से 1864 तक यह पर्व 12 जनवरी को मनाया जाता था. इसके बाद 1864 से 1936 तक यह 13 जनवरी को मनाया गया. 1936 से 2008 तक 14 जनवरी इसकी स्थायी तिथि रही. अब एक बार फिर समय चक्र के अनुसार इसमें बदलाव हुआ है और 15 जनवरी नई पहचान बन रही है.

ज्योतिष गणना को माना जाता है अंतिम सत्यविद्वानों का मानना है कि खगोलीय और ज्योतिषीय गणनाएं पूरी तरह वैज्ञानिक और तर्कसंगत होती हैं. इन्हीं गणनाओं के आधार पर पर्वों की तिथियां तय की जाती हैं. मकर संक्रांति के मामले में भी यही सिद्धांत लागू होता है. इसलिए आने वाले वर्षों में यह पर्व 15 जनवरी को ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा.Location :Mirzapur,Uttar PradeshFirst Published :January 13, 2026, 21:41 ISThomeuttar-pradeshकालचक्र के साथ परिवर्तित होती संक्रांति, सनातन परंपरा का संकेत

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