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मैदान पर बल्लेबाजों के लिए काल, बेबाक वक्ता; इन विवादों से रहा बिशन सिंह बेदी का नाता



Bishan Singh Bedi News: अपनी आर्म बॉल से लेकर फ्लाइट लेती गेंदों से दुनिया भर के बल्लेबाजों को चकमा देने वाले बिशन सिंह बेदी भारतीय स्पिन चौकड़ी की वह अबूझ पहेली थे, जो अपने फैसलों और बेबाक टिप्पणियों के कारण विवादों में भी रहे. दुनिया के सबसे लोकप्रिय क्रिकेटरों में से एक बिशन सिंह बेदी का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को 77 साल की उम्र में निधन हो गया. इसके साथ ही वर्ल्ड क्रिकेट ने एक ऐसे सितारे को अलविदा कह दिया, जिसने कई दशक तक भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने में अपना अमूल्य योगदान दिया.
बिशन सिंह बेदी मैदान पर बल्लेबाजों के लिए कालबिशन सिंह बेदी का जन्म 25 सितंबर 1946 को पंजाब के अमृतसर शहर में हुआ था. वह भारत की उस स्पिन चौकड़ी का हिस्सा थे, जिसमें उनके अलावा इरापल्ली प्रसन्ना, भागवत चंद्रशेखर और श्रीनिवास वेंकटराघवन शामिल थे. बिशन सिंह बेदी ने लगभग 12 साल तक भारतीय गेंदबाजी का जिम्मा संभाला. यह बेहद कलात्मक बाएं हाथ का स्पिनर अपनी पीढ़ी के बल्लेबाजों के लिए हमेशा अबूझ पहेली बना रहा. वह गेंद को जितना संभव हो उतनी ऊंचाई से छोड़ते थे और उनका नियंत्रण गजब का था.
DDCA भी उनके निशाने पर रहा
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) और दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) भी उनके निशाने पर रहे. उन्होंने फिरोजशाह कोटला स्टेडियम का नाम बदलकर अरुण जेटली स्टेडियम करने का भी पुरजोर विरोध किया था. बिशन सिंह बेदी ने टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू 31 दिसंबर 1966 को वेस्टइंडीज के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डन्स में किया था और वह 1979 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे. बिशन सिंह बेदी ने इस बीच 67 टेस्ट मैच खेले जिनमें 28.71 की औसत से 266 विकेट लिए. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बेदी के नाम पर 1560 विकेट दर्ज हैं.
टीम के कोच और राष्ट्रीय चयनकर्ता भी रहे
बिशन सिंह बेदी 22 मैचों में भारत के कप्तान भी रहे जिनमें से छह में भारतीय टीम ने जीत दर्ज की. क्रिकेट संन्यास लेने के बाद बेदी भारतीय टीम के कोच और राष्ट्रीय चयनकर्ता भी रहे. बिशन सिंह बेदी 1990 में न्यूजीलैंड और इंग्लैंड दौरे के दौरान कुछ समय के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर थे. वह मनिंदर सिंह और मुरली कार्तिक जैसे कई प्रतिभाशाली स्पिनरों के गुरु भी थे.
बल्लेबाज चकमा खा बैठते थे
बाएं हाथ के स्पिनर बिशन सिंह बेदी  स्पिन की हर कला जानते थे. चाहे वह तेजी में बदलाव हो या वैरीएशन. उनकी फ्लाइट, आर्म बाल और अचानक से की गई तेज गेंद पर बल्लेबाज चकमा खा बैठते थे. वर्ल्ड क्रिकेट में जब भी आर्म बॉल का जिक्र आएगा तब जेहन में पहला नाम बिशन सिंह बेदी का होगा, जिन्होंने बाएं हाथ के स्पिनरों की गुगली कही जाने वाली इस गेंद को नया जीवन दिया था.
आर्म बॉल के मामले में बेदी बाजी मार जाते
बेदी ने अपनी आर्मर से दुनिया के कई दिग्गज बल्लेबाजों को चकमे में डाला. यदि यह रिकॉर्ड भी रखा जाता कि एक गेंदबाज ने किस तरह की गेंद पर सर्वाधिक विकेट लिये तो निश्चित तौर पर आर्म बॉल के मामले में बेदी बाजी मार जाते. जब भी कोई बल्लेबाज उन पर हावी होने की कोशिश करता था तब वह आर्मर का उपयोग करते थे. ऐसा नहीं कि उन्हें हर बार आर्म बॉल करने पर सफलता ही मिलती थी, लेकिन इस गेंद ने उन्हें कई अवसरों पर विकेट दिलाए.
इन विवादों से रहा बिशन सिंह बेदी का नाता
बेदी ने 15 साल की उम्र में उत्तरी पंजाब की तरफ से 1961-62 में रणजी ट्राफी में डेब्यू किया और बाद में वह दिल्ली की तरफ खेले. विकेट निकालने में वह माहिर थे और इसलिए कभी उनका तीर खाली नहीं जाता था. एक समय नार्थम्पटनशर को उन्होंने काउंटी क्रिकेट में खासी सफलता दिलाई थी. बेदी का विवादों से भी पुराना नाता रहा है. अपनी बेबाक टिप्पणियों के कारण वह जब तब विवादों में भी फंसते रहे. वह 1976-77 में इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जान लीवर के वैसलीन का उपयोग करने पर आपत्ति जताने और 1976 में वेस्टइंडीज की खौफनाक गेंदबाजी के कारण किंग्सटन में भारत की दूसरी पारी समाप्त घोषित करने के कारण भी चर्चा में रहे थे.



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