Uttar Pradesh

Maha Kumbh Mela 2025 : जूना अखाड़े ने 13 साल की लड़की को वापस भेजा घर, जानें कैसे बनते हैं नागा संन्यासी?

Last Updated:January 11, 2025, 16:36 ISTMaha Kumbh Mela 2025 : प्रयागराज महाकुंभ की शुरुआत से पहले जूना अखाड़े ने बड़ा फैसला लिया है. जूना अखाड़े ने 13 साल की राखी सिंह को संन्यास की दीक्षा देने वाले महंत कौशल गिरि के खिलाफ कार्रवाई की है. साथ ही नाबालिग लड़की को…और पढ़ेंप्रयागराज : प्रयाग महाकुंभ-2025 के लिए भक्तों और साधु-संतों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है, लाखों की संख्या में नागा और अन्य संन्यासी प्रयाग की पावन धरती पर जप-तप और साधना करते नजर आ रहे हैं. इन संन्यासियों के जीवन, तप, साधना और सनातन धर्म से प्रभावित होकर आम लोग भी संन्यास धारण कर रहे हैं. इसमें पुरुष, महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं. हाल ही में आगरा की 13 साल की राखी सिंह को दीक्षा देकर जूना अखाड़े में शामिल किया था. लेकिन संन्यास से जुड़े कुछ नियमों के चलते राखी सिंह को अब अयोग्य करार दे दिया गया है.

प्रयागराज महाकुंभ की शुरुआत से पहले जूना अखाड़े ने बड़ा फैसला लिया है. जूना अखाड़े ने 13 साल की राखी सिंह को संन्यास की दीक्षा देने वाले महंत कौशल गिरि के खिलाफ कार्रवाई की है. साथ ही नाबालिग लड़की को भी संत के लिए अयोग्य करार दिया है. जूना अखाड़े ने महंत कौशल गिरि को 7 साल के लिए अखाड़े से निष्कासित किया है. जूना अखाड़े की महासभा ने सर्वसम्मति से 7 साल के लिए महंत कौशल गिरि को अखाड़े से निष्कासित किया है. साथ ही नाबालिग लड़की को तत्काल उसके माता-पिता के पास वापस भेजने का आदेश दिया है.

नागा साधु बनने के नियम

अगर कोई इंसान नागा साधु बनना चाहता है तो अखाड़ा अपने स्तर पर उसके व उसके परिवार के बारे में छानबीन करता है.

तहकीकात के बाद इच्छुक इंसान को अखाड़े में प्रवेश की अनुमति मिलती है.

अखाड़े में प्रवेश के बाद साधक के ब्रह्मचर्य की परीक्षा ली जाती है.

अगर अखाड़ा और उस व्यक्ति का गुरु यह निश्चित कर लें कि वह दीक्षा देने लायक हो चुका है फिर उसे

अगली प्रक्रिया में ले जाया जाता है. इस प्रक्रिया में 6 महीने से लेकर 12 साल तक लग जाते हैं.परीक्षा पास करने के बाद साधक के 5 गुरु बनाए जाते हैं.

साधक को सबसे पहले अपने बाल कटवाने होते हैं. फिर साधक स्वयं को अपने परिवार और समाज के लिए मृत मानकर अपने हाथों से अपना श्राद्ध कर्म करता है. ये पिंडदान अखाड़े के पुरोहित करवाते हैं.

दीक्षा के बाद गुरु से मिले गुरुमंत्र में ही उसे संपूर्ण आस्था रखनी होती है। उसकी भविष्य की सारी तपस्या इसी गुरु मंत्र पर आधारित होती है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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