Prayagraj Magh Mela 2026 Live: संगम की रेती पर चल रहे विश्व प्रसिद्ध माघ मेले में आज भक्ति और राष्ट्रभक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिला. गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर माघ मेले के विभिन्न शिविरों में साधु-संतों और कल्पवासियों ने पूरे उत्साह के साथ ध्वजारोहण किया. धर्म ध्वजा के साथ-साथ आसमान में शान से लहराते तिरंगे ने संगम तट की आध्यात्मिक आभा में देशभक्ति का जोश भर दिया. पढ़ें पूरी रिपोर्ट…
एंट्री पर रोक के बावजूद लोग गाड़ियों से पहुंच रहे हैं घाटमाघ मेला क्षेत्र में अनियंत्रित वाहनों पर पुलिस का शिकंजा. घाट किनारे वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है, बावजूद इसके लोग मान नहीं रहे हैं. लोग यहां पर पहुंचकर अपनी गाड़ियों को पार करके चले जा रहे हैं. ऐसे में व्यवस्था में अव्यवस्था उत्पन्न होती है. ये लोग लड़ने के लिए तैयार होते हैं. ऐसे लोगों को यातायात की तरफ से चलान भी किया जा रहा है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने किया ध्वजारोहणमौनी अमावस्या पर हुए विवाद के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अनशन नौवें दिन भी जारी. गणतंत्र दिवस के मौके पर शिविर के बाहर ही किया ध्वजारोहण. शिष्यों, अनुयायियों और श्रद्धालुओं के साथ राष्ट्र गान गाया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भारत माता की जय के लगाए जयकारे. ध्वजारोहण के बाद फिर से अनशन पर शिविर के बाहर बैठ गए हैं.
संतों ने फहराया तिरंगा, राष्ट्रगान से गुंजायमान हुआ मेला क्षेत्रमेले के सेक्टर-9 स्थित नागेश्वर धाम आश्रम में दंडी संन्यासियों ने कल्पवासियों और श्रद्धालुओं के साथ मिलकर तिरंगा फहराया. स्वामी महेशाश्रम महाराज, स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज और स्वामी शंकराश्रम महाराज ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया. इस दौरान भगवाधारी संतों ने राष्ट्रगान गाया और ‘भारत माता की जय’ व ‘वंदे मातरम’ के जयकारे लगाए. संतों ने देशवासियों को राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने और समाज को एकजुट कर मजबूत बनाने का संदेश दिया.
माघी पूर्णिमा पर बनेगा ‘रविपुष्य’ और ‘चतुर्ग्रहीय’ संयोगमाघ मेले का अगला पड़ाव अब पांचवां मुख्य स्नान पर्व ‘माघी पूर्णिमा’ है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार पूर्णिमा पर अत्यंत दुर्लभ ग्रह-नक्षत्रों का संयोग बन रहा है.
पूर्णिमा तिथि: 1 फरवरी, सुबह 5:19 बजे से रात 3:46 बजे तक.
शुभ योग: पूरे दिन रविपुष्य योग रहेगा. साथ ही मकर राशि में मंगल, बुध, शुक्र और सूर्य के संचरण से ‘चतुर्ग्रहीय संयोग’ बनेगा.
1 फरवरी की शाम शुक्रोदय के साथ ही मांगलिक कार्य और विवाह आदि शुरू हो जाएंगे. मत्स्य पुराण के अनुसार, माघी पूर्णिमा पर स्वयं देवता स्वरूप बदलकर संगम में स्नान करने आते हैं. इस दिन दान-पुण्य करने से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है.
अचला सप्तमी पर उमड़ी भीड़, सुरक्षा के कड़े इंतजामरविवार को अचला सप्तमी के अवसर पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब संगम तट पर उमड़ पड़ा. भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अलोपीबाग फ्लाईओवर सहित कई प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों को रोक दिया, जिससे शहर में जाम की स्थिति भी बनी. आगामी भीड़ को देखते हुए पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार और एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. अजय पाल शर्मा ने सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए हैं. एसपी मेला नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि सुरक्षा के लिए 5 अतिरिक्त पीएसी कंपनियां तैनात की गई हैं.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार पर साधा निशानामेला क्षेत्र में हलचल के बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बड़ा बयान सामने आया है. शिविर के बाहर हुए हंगामे पर उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन उनके खिलाफ साजिश रच रहा है. उन्होंने कहा, ‘मुझे सरकार से नहीं बल्कि सनातनी जनता से न्याय की उम्मीद है.’ उन्होंने मुख्यमंत्री को जिद छोड़कर मर्यादापूर्वक व्यवहार करने की नसीहत भी दी.

