ईरान में इजराइल और अमेरिका के हमले के बाद लखनऊ के शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद का परिवार भी वहां फंस गया है. उनका बेटा, बहन और भतीजा वहां फंसे हुए हैं और वतन वापसी की राह देख रहे हैं. मौलाना कल्बे जव्वाद ने ईरान युद्ध को लेकर भारत सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं.
लखनऊ के प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद के बेटे कल्बे अहमद और उनकी बहन ईरान में फंस गए हैं. वहां इजराइल-अमेरिका की तरफ से मिसाइल हमलों और उड़ानों के रुक जाने की वजह से वे भारत वापस नहीं आ पा रहे हैं. इतना ही नहीं, इस महायुद्ध की वजह से लखनऊ और आसपास के करीब 3000 लोग वहां फंसे हैं.
मौलाना कल्बे जवाद ने बताया कि उनका बेटा कल्बे अहमद पिछले करीब 6 साल से क़ुम शहर में पढ़ाई कर रहा है. उनका भतीजा भी वहां 16 साल से रह रहा है. बहन और कुछ अन्य रिश्तेदार भी उनके साथ हैं. परिवार फोन पर बात करता है, लेकिन बातचीत के दौरान पीछे धमाकों की आवाजें सुनाई देती हैं, जिससे सब बहुत चिंतित हैं.
करीब 3000 लोग फंसे हुए हैं ईरान में, जहां इंटरनेट पूरी तरह बंद हो गया है, इसलिए संपर्क बहुत मुश्किल हो गया है. लखनऊ और आसपास के जिलों जैसे कानपुर, बरेली, आगरा, मेरठ, प्रयागराज के करीब 3,000 परिवारों के रिश्तेदार ईरान में फंसे हुए हैं. ज्यादातर लोग वहां पढ़ाई, नौकरी या जियारत के लिए गए थे. कुल मिलाकर लखनऊ के लगभग 1 लाख लोग खाड़ी देशों में रहते हैं, और उनमें से कई अब परेशान हैं.
भारत की नीति पर उठाए गए सवाल मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा, “अल्हम्दुलिल्लाह, मेरा बेटा अभी सुरक्षित है.” उन्होंने इजरायल और अमेरिका पर हमलों की कड़ी निंदा की और संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि इन हमलों में 100 से ज्यादा बच्चे मारे गए हैं. मौलाना ने भारत की नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि ईरान मजबूत रहेगा. परिवार वाले टीवी और सोशल मीडिया पर खबरें देखकर दुआएं मांग रहे हैं. लोग सुरक्षित हैं, लेकिन उड़ानें सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि घर लौट सकें. इस स्थिति से लखनऊ के शिया समुदाय में गहरी चिंता है.

