लखनऊ. लखीमपुर खीरी कांड में 4 सिख किसानों की मृत्यु के बाद यह समुदाय अचानक सियासत के केंद्र में आ गया है. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस द्वारा सरकार का घेराव किए जाने पर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने बुधवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के जरिए कांग्रेस पर पलटवार किया. वहीं, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव सिख समुदाय के एक कार्यक्रम में शरीक हुए और सिखों की जमकर तारीफ की.
बता दें कि लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया क्षेत्र में पिछले रविवार को हुई हिंसा में मारे गए चारों किसान सिख समुदाय के थे. उनके परिवारों से मुलाकात के लिए सोमवार सुबह निकलीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को सीतापुर में हिरासत में ले लिया गया था. सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस की आक्रामकता के बीच राज्य की भाजपा सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी यह भूल गए हैं कि सिख विरोधी दंगे कांग्रेस के शासनकाल में हुए थे और भाजपा उस पीड़ित समुदाय के साथ खड़ी थी. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार के उस संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ अभियान चलाया, जिसका सबसे ज्यादा फायदा अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आने वाले सिखों को मिलना था.
इन्हें भी पढ़ें : गाड़ियों के लंबे-चौड़े काफिले के साथ लखीमपुर पहुंचे राहुल गांधी
इसके अलावा, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के लखनऊ आने से ठीक पहले राजधानी लखनऊ में जगह-जगह बैनर और होर्डिंग लगवाए गए, जिनमें सिख विरोधी दंगों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हुए प्रियंका और राहुल से वापस जाने को कहा गया. भाजपा ने उन बैनर और होर्डिंग को मीडियाकर्मियों से साझा किया. राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि लखीमपुर जाने और किसानों से मिलने का दम भरने वाली कांग्रेस पार्टी को सिखों ने आईना दिखाने का काम किया है. राहुल और प्रियंका गांधी की झूठी सहानुभूति से उनमें उबाल है.
इन्हें भी पढ़ें : Lakhimpur Kheri Violence: पुलिस ने लोगों से मांगे घटना से जुड़े Video, कही ये बड़ी बात
लखनऊ में जगह-जगह लगे होर्डिंग में ‘नहीं चाहिए फर्जी सहानुभूति, राहुल गांधी वापस जाओ, प्रियंका गांधी वापस जाओ, सिखों के कातिल वापस जाओ, नहीं चाहिए साथ तुम्हारा’ जैसे नारे लिखे थे. इन होर्डिंग्स में राजेंद्र सिंह बग्गा, अध्यक्ष, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, पटेल नगर समेत सिख समुदाय के कई लोगों के नाम लिखे हुए हैं. होर्डिंग्स में कहा गया है कि जिनके हाथ सिखों के जनसंहार से रंगे हुए हैं, किसानों को उनका साथ नहीं चाहिए. इस बीच, पंजाब की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए चारों सिख किसानों और एक पत्रकार के परिजन को कुल एक-एक करोड़ रुपये की सहायता का ऐलान किया.
इन्हें भी पढ़ें : Lakhimpur Kheri Case: राहुल और प्रियंका गांधी के साथ पायलट ने भी संभाला मोर्चा
उधर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शाहजहांपुर के बड़ा गुरुद्वारा नानकपुरी सुनसारघाट पहुंचकर मत्था टेका और संत बाबा सुखदेव सिंह जी भूरिवालों की सालाना बरसी कार्यक्रम में शिरकत की. उन्होंने अपने सम्बोधन में याद दिलाया कि आजादी की लड़ाई में सिख समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा है. सिख भाइयों ने पूरी दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ाया है. समाजवादी सरकार में सिख समाज का हमेशा से सम्मान किया गया है.
इन्हें भी पढ़ें : लखीमपुर को लेकर योगी सरकार ने बदली अपनी रणनीति, जानें क्यों दी अब विपक्ष के नेताओं को वहां जाने की मंजूरी?
अखिलेश ने लखीमपुर खीरी की घटना का जिक्र करते हुए कहा ‘हाल में जो घटना हुई, वह हमें याद दिलाती है कि किस तरह से अंग्रेजों ने अन्याय किया था. आज भाजपा की सरकार उन अंग्रेजों से भी आगे निकल गई है. भाजपा नेता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे का अहंकार देखिए. मिश्रा पहले किसानों को धमकी देते हैं और इसी का परिणाम है कि उनका बेटा गाड़ी लेकर निकला और हमारे सिख भाइयों को कुचलने का काम किया है.’ सपा अध्यक्ष ने कहा, ‘हमें पूरा भरोसा है कि न्याय मिलेगा और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, सपा आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस लड़ाई को लड़ेगी.’
इन्हें भी पढ़ें : Lakhimpur Violence: केन्द्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा आखिर क्यों कर सकते है सरेंडर, जानें क्या है इसके पीछे की वजह?
गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी और पीलीभीत समेत तराई पट्टी में सिख किसानों की अच्छी खासी आबादी है और इस इलाके को मिनी पंजाब भी कहा जाता है. पिछले रविवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के निर्वाचन क्षेत्र में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध कर रहे किसानों में ज्यादातर सिख समुदाय के ही थे. लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर और तराई पट्टी के आसपास के जिलों के सिख किसान तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन में खासे सक्रिय हैं. लखीमपुर खीरी की घटना के बाद यह सिख किसान राजनीतिक दलों के लिए सियासी लिहाज से महत्वपूर्ण हो गए हैं.पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.
Source link
Halwa Paratha Recipe : गोरखपुर के इस हलवा पराठा की बात निराली, इसके आगे सारे पकवान फीके, जानें रसोइयों वाली रेसिपी
Last Updated:February 09, 2026, 04:09 ISTHalwa Paratha Recipe Gorakhpur : हलवा पराठा किसे नहीं पसंद. बात अगर गोरखपुर…

