Uttar Pradesh

Ladyfinger Farming : लागत 5, मुनाफा 70…अगेती भिंडी की खेती किसानों के लिए वरदान, जानें तरीका

होमताजा खबरकृषिलागत 5, मुनाफा 70…अगेती भिंडी की खेती किसानों के लिए वरदान, जानें तरीकाLast Updated:March 15, 2026, 19:46 ISTBhindi ki ageti kheti : मार्च का महीना आधा बीत चुका है और गर्मियां दस्तक दे चुकी हैं. गर्मियों में हरी सब्जी की मांग बढ़ जाती है. किसान इनकी अगेती खेती कर पैसा पीट सकते हैं. बाराबंकी के सहेलियां गांव के किसान शेखर ने इस बार दो बीघे में भिंडी लगाई है. लागत प्रति बीघा 5 से 6 हजार रुपये आई है. इस समय उनकी भिंडी निकल रही है. लोकल 18 से किसान शेखर बताते हैं कि इसकी खेती करना बहुत आसान है. बीजों की बुवाई लाइन टू लाइन की जाती है. बुवाई के 50 से 55 दिनों बाद फसल निकलना शुरू हो जाती है.बाराबंकी.  किसी भी फसल की अगेती खेती किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रही है. सब्जी किसानों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं. मार्च का महीना आधा बीत चुका है. गर्मियां दस्तक दे चुकी हैं. गर्मियों में हरी सब्जी की मांग बढ़ जाती है. किसान इनकी अगेती खेती कर अच्छा पैसा कमा सकते हैं. इन्हीं फसलों में भिंडी प्रमुख है. भिंडी की अगेती खेती कर किसान कम समय में अच्छा पैसा कमा सकते हैं. बाराबंकी का एक किसान कई साल से भिंडी की अगेती खेती कर रहा है. उसे इसमें लागत से ज्यादा मुनाफा मिल रहा है. बाराबंकी के सहेलियां गांव के रहने वाले किसान शेखर दूसरी फसलों के साथ भिंडी भी उगाते हैं. इस बार उन्होंने दो बीघे में भिंडी लगाई है. एक फसल पर 60 से 70 हजार रुपये मुनाफा हो जाता है.

किसान शेखर लोकल 18 से बताते हैं कि वे करीब चार साल से हरी सब्जियों की खेती ज्यादा करते हैं. इसमें मूली, कद्दू, करेला, लौकी और भिंडी शामिल हैं. इस समय उन्होंने दो बीघे में भिंडी लगाई है. इसमें लागत प्रति बीघा 5 से 6 हजार रुपये आई है. इस समय उनकी भिंडी निकल रही है और रेट भी अच्छा मिल रहा है. लागत बेहद कम है और मुनाफा कहीं अधिक. भिंडी की मांग बाजार में हमेशा रहती है. इसे एक बार लगाने के बाद तीन से चार महीने तक फसल मिलती रहती है.

अपनाएंं ये विधि

किसान शेखर बताते हैं कि इसकी खेती करना बहुत आसान है. पहले खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी भुरभुरी बनाई जाती है. खेत में मेड़ बनाकर उस पर बीजों की बुवाई लाइन टू लाइन की जाती है. इस विधि से बुवाई में खरपतवार कम होता है और पैदावार ज्यादा होती है. खाद और कीटनाशकों का छिड़काव करने में आसानी होती है. फसल को तोड़ने में भी समय की बचत होती है. बुवाई के 50 से 55 दिनों बाद फसल निकलना शुरू हो जाती है.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Bara Banki,Uttar PradeshFirst Published :March 15, 2026, 19:46 IST

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