Uttar Pradesh

क्या आप जानते हैं कान्हा को देख राधा ने खोली थी आंख, गोपाल से इतनी बड़ी है लाड़ली, जानें कुछ अनजाने राज

Last Updated:June 06, 2025, 12:23 ISTबृज की पावन भूमि में छुपा है एक ऐसा किस्सा, जो राधा और कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है और जिसे जानकर आपकी सोच बदल जाएगी. यह कहानी दोनों के बीच उम्र और रिश्ते की एक अनोखी दास्तान बयां करती है, जो सामान्य नजरों स…और पढ़ेंX

कृष्ण राधा रानी से छोटे हैं और यहीं वजह है कि राधा नाम कृष्ण से पहले आता है.हाइलाइट्सराधा कृष्ण से साढ़े 11 महीने बड़ी थीं.राधा ने कृष्ण को देखकर पहली बार आंखें खोलीं.राधा का जन्म रावल गांव में हुआ था.मथुरा: ब्रज राधा कृष्ण की लीलाओं से काफी प्रचलित है. यहां आपको राधा और कृष्ण की लीलाओं का रहस्य कहीं ना कहीं देखने और सुनने को मिलेगा. एक रहस्य राधा और कृष्ण से जुड़ा हुआ आज भी सुनाई देता है. क्या आपको पता है कि राधा कृष्ण से उम्र में बड़ी थीं और कृष्ण ने राधा रानी को देखकर ही अपनी आंखें खोली थीं? आइए जानते हैं कि राधा कृष्ण से कितने साल बड़ी थीं.

राधा रानी नहीं लाड़ली है नाम यह तो सभी जानते हैं कि राधा रानी का जन्म बरसाना में हुआ, लेकिन वास्तविकता यह है कि राधा रानी का जन्म बरसाने में नहीं बल्कि रावल गांव में हुआ था. कहा जाता है कि राजा वृषभानु यमुना में स्नान के लिए गए थे, जहां उन्हें कमल पुष्प में राधा रानी मिलीं. इसलिए उनका यहां घुटने मुड़े चलने वाला बाल रूप दर्शाया जाता है. ब्रज की बेटी को लाडली भी कहा जाता है और राधा रानी को बरसाना में लाडली जी के नाम से जाना जाता है.

देश के कोने-कोने से आते है भक्त
मथुरा डिस्ट्रिक्ट मेमोरियल बुक, ब्रज वैभव पुस्तक, गर्ग संहिता और ब्रज परमानंद सागर में रावल गांव का जिक्र मिलता है, जहां वृषभानु का राजमहल और निवास था. मुगलों के आक्रमण और यमुना की बाढ़ के कारण मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा था. सन 1924 में आई बाढ़ में यह मंदिर पूरी तरह तबाह हो गया था, जिसे वृंदावन के सेठ हरगुलाल ने दुबारा बनवाया. आज देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं.

कितनी बड़ी है राधा रानी और कैसे खोली आंखें 
ऐसा कहा जाता है कि वृषभानु की दुलारी राधा रानी, श्री कृष्ण से करीब साढ़े 11 महीने बड़ी थीं और उन्होंने जन्म के बाद अपनी आंखें नहीं खोली थीं. रावल गांव से लगभग 8 किलोमीटर दूर गोकुल में जब कन्हैया का जन्म हुआ, तब नंद उत्सव में राजा वृषभानु और माता कीर्ति बधाई देने गए थे और राधा रानी भी साथ गई थीं. तब राधा रानी घुटनों के बल चलकर श्याम सुंदर के पालने तक पहुंचीं और श्री कृष्ण को नजर भरके देखकर पहली बार अपनी आंखें खोली थीं.

इतने साल से बिना जड़ के जिंदा है ये वृक्ष. मंदिर के पुजारी ने बताया कि मंदिर की छत पर एक ऐसा वृक्ष उगा हुआ है जिसकी कोई जड़ नहीं है. यह वृक्ष साल भर हरा-भरा रहता है और इसे लोग हमेशा से इसी तरह देखते आए हैं. पुजारी ने कहा कि जब से उन्होंने होश संभाला है, यह वृक्ष यहीं खड़ा है. यह पेड़ लाडली राधा के पालने के ऊपर मंदिर की गुंबद में उगा हुआ है और इसे मन्नत का पेड़ भी कहा जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालु अपने हाथों से मन्नत का धागा बांधते हैं, और जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है, तो वे वापस आकर वह धागा खोल देते हैं. यह वृक्ष बिना जड़ के लगभग 5250 साल से जीवित है.

Location :Mathura,Uttar Pradeshhomeuttar-pradeshराधा ने कान्हा को देखा तो खुली उनकी पहली आंख, जानिए लाड़ली राधा के छुपे रहस्य

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