Uttar Pradesh

कमाई वाली फसल की करें खेती, बाजार में खरीदने के लिए लोग लगाते हैं लाइन, इतने दिन में हो जाता है तैयार

Last Updated:February 08, 2026, 12:03 ISTFarrukhabad news: एक समय था जब गांव में रोजगार न होने के चलते यहां के मेहनतकश किसानों को शहर की ओर रुख करना पड़ता था. लेकिन अब समय बदलने के साथ ही यहां के किसान भी आधुनिक खेती करने के लिए निपुण हो गए हैं. ऐसे समय पर न केवल उन्होंने खेती किसानी का तरीका बदला है. बल्कि कम भूमि पर ही तगड़ी कमाई कर रहे हैं. जिसमें राजमां से मिल रहे सौ रुपए प्रति किलो के दाम है.ख़बरें फटाफटफर्रुखाबाद: अब खेती सिर्फ गेहूं, धान और गन्ने तक सीमित नहीं रही. उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में किसानों ने सब्जी की खेती को नया आधार बना लिया है. इसमें राजमां की फली यानी ग्वार फली सबसे ज्यादा फायदा दे रही है. कम लागत और ज़्यादा मुनाफा देने वाली इस सब्जी की बाजार में जबरदस्त डिमांड है. यही कारण है कि किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर राजमां की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में सौ रुपए प्रति किलो के मिल रहे हैं दाम.

आधुनिक खेती से किसानो की बदल रही जिंदगी

एक समय था जब गांव में रोजगार न होने के चलते यहां के मेहनतकश किसानों को शहर की ओर रुख करना पड़ता था. लेकिन अब समय बदलने के साथ ही यहां के किसान भी आधुनिक खेती करने के लिए निपुण हो गए हैं. ऐसे समय पर न केवल उन्होंने खेती किसानी का तरीका बदला है. बल्कि कम भूमि पर ही तगड़ी कमाई कर रहे हैं. जिसमें यहां के किसान आलू- धान को छोड़कर सब्जियों की खेती करते हैं जिससे इन्हें होती है नगदी वाली कमाई.

लोकल18 को पेशकार शाक्य जो आलेपुर शमशाबाद ने बताया कि वह अपने खेतों में राजमां और भिंडी, लौकी, शलजम जैसी फसलों को मिश्रित रूप में उगाते हैं. जिसमें आमतौर पर छह हजार रूपए प्रति बीघा की लागत आती है. वही जब एक बार फसल तैयार हो जाती है तो बंपर आमदनी वह भी कैश में आना शुरू हो जाता है. क्योंकि सबसे पहले भिंडी की फसल तैयार होती है जो हर सप्ताह तुड़ाई की जाती है. वही इस फसल से 6 से 10 बार राजमां की तुड़ाई की जाती है. इसके बाद तैयार होती है लौकी के साथ ही दूसरी फसले जिससे बिक्री का यह क्रम बना रहता है और लगातार नगदी के रूप में कमाई भी होती रहती है.

राजमा की खेती में बेहतर मुनाफा

किसान बताते हैं की राजमां सब्जी की पैदावार काफी अच्छी होती जिससे उन्हें मुनाफा भी हो रहा है. लेकिन कभी-कभी सही भाव मंडी में नहीं मिल पाता है. जिसके कारण इन्हें लाभ कम हो पाता लेकिन इस समय पर सब्जियों की बिक्री अच्छी हो रही है और कमाई भी कर रहे हैं. पेशकार शाक्य बताते हैं कि जिस प्रकार सब्जियों की फसले साल भर विशेष तरीके से की जाती हैं. ऐसे समय पर इसका उत्पादन भी अच्छा होता रहता है.

बस इसमें नमी बनाई रखने के लिए समय से सिंचाई की जाती है. जब फसल तैयार हो जाती है तो उस समय अच्छे तरीके से उसकी देखरेख और तुड़ाई करके मंडी में वह बिक्री करते रहते हैं. जिस प्रकार वह है इन सब्जियों को तैयार करने में जैविक उर्वरक का इस्तेमाल करते हैं. जो कि वह अपने घर पर ही तैयार करते हैं जिसके कारण लागत कम हो जाती है और रोसा का उत्पादन अच्छा होता है.

राजमा की खेती का ये है सही समय

राजमां की खेती किसी भी क्षेत्र में आसानी से की जा सकती है जिस प्रकार राजमां की खेती उचित जल निकासी वाले खेतों में सही रहती है. जिसमें मृदा में कम सिंचाई के बावजूद भी नमी बनी रहे और गर्मी और बारिश के मौसम में जल भराव न हो सके. इसके लिए हल्की दोमट मिट्टी उचित मानी जाती है. वही विभिन्न प्रकार के अलग मौसम में भी यह फसले तैयार की जा सकती हैं.About the AuthorRajneesh Kumar Yadavमैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ेंLocation :Farrukhabad,Uttar PradeshFirst Published :February 08, 2026, 12:03 ISThomeagricultureकमाई वाली फसल की करें खेती, बाजार में खरीदने के लिए लोग लगाते हैं लाइन

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