Uttar Pradesh

कम समय, डबल कमाई! फरवरी में लगाएं तोरई की ये 5 उन्नत किस्में, किसान बनेंगे मालामाल

तोरई की खेती का सही समय! जानिए कौन सी किस्म देगी सबसे ज्यादा मुनाफा

पारंपरिक फसलों के साथ अब किसान सीजनल सब्जियों की खेती की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं, क्योंकि सही समय पर बोई गई फसल बाजार में बेहतर दाम दिलाती है. ऐसी ही एक फसल है तोरई, जिसकी गर्मियों में मांग काफी बढ़ जाती है. सब्जी के रूप में रोजमर्रा के इस्तेमाल के कारण इसकी खपत लगातार बनी रहती है. अगर किसान मौसम के अनुसार इसकी खेती करें, तो कम समय में अच्छी पैदावार के साथ शानदार मुनाफा कमा सकते हैं।

वैसे किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ ऐसी सब्जियों की खेती पर भी ध्यान दे रहे हैं, जो कम समय में ज्यादा मुनाफा दें. इन्हीं फसलों में से एक है तोरई. बेल वाली यह सब्जी कम जगह में भी आसानी से उगाई जा सकती है और बाजार में इसकी मांग भी हमेशा बनी रहती है, क्योंकि तुरई की खेती को व्यवसायिक फसल भी कहा जाता है. ऐसे में किसान अगर इसकी अगेती खेती करना चाहता है तो इसकी कुछ उन्नत किस्मे है, जो कम समय में अधिक पैदावार देती हैं।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि गर्मियों के सीजन में हरी सब्जियों की खेती फायदेमंद मानी गई है. ऐसे में कुछ सब्जिया ऐसी हैं जिसे किसान सीजन के हिसाब से करते हैं तो अधिक लाभ कमा सकते हैं. ऐसी ही एक फसल है तोराई, जिसकी अगेती खेती फरवरी मार्च में करना चाहते हैं तो इसकी कुछ उन्नत किस्मों की खेती कर सकते हैं. इन उन्नत किस्मों की खेती से बेहद कम समय में अच्छी पैदावार के साथ बढ़िया मुनाफा ले सकते हैं।

कोयम्बूर 2 तोरई की इस किस्म के फल आकार में पतले और कम बीज वाले होते हैं. इस किस्म से के से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त हो सकती है. इस किस्म के फल 110 दिन में पककर तैयार हो जाते हैं।

स्वर्ण प्रभा- इस किस्म की फसल को तैयार होने में थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, लेकिन पैदावार अच्छी होती है. बुवाई के 70-75 दिन बाद फसल तोड़ने लायक हो जाती है. प्रति हेक्टेयर उपज क्षमता 200-250 क्विंटल है।

काशी दिव्या तोरई की इस किस्म के पौधों का तना 4.5 मीटर लंबा और फल बेलनाकार होते हैं. रंग हल्का हरा और लंबाई 20 से 25 सेंटीमीटर होती है. बुवाई के 48-50 दिन के बाद फसल तैयार हो जाती है. इसकी उपज क्षमता 130-160 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

पी के एम 1 इस किस्म के फल देखने में गहरे हरे रंग का होते हैं. इससे 280-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिल सकती है. इस किस्म का फल 160 दिन में पककर तैयार हो जाता है. इसके साथ ही फल देखने में पतला, लम्बा, धारीदार एवं हल्का से मुड़ा हुआ होता है।

पूसा स्नेहा- इस किस्म की तोरई का रंग गहरा हरा और लंबाई 20-25 सेंटीमीटर होती है. बीज डालने के 50-55 दिन बाद फसल तोड़ने के लिए तैयार हो जाती है. इसकी उपज क्षमता भी अच्छी है. प्रति हेक्टेयर 200-230 क्विंटल तोरई की पैदावार होती है.

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