Uttar Pradesh

किसानों की किस्मत बदलने आई ये चेरी, 4 अमरूद के बराबर एक में विटामिन सी, इसका खट्टा-मीठा स्वाद जीता रहा दिल।

कानपुर में वैज्ञानिकों ने विदेशी फल बारबडास चेरी की नई प्रजाति विकसित की, जो उत्तर प्रदेश की जलवायु में तेजी से फल-फूल रही है. इस चेरी के एक फल में चार अमरूद के बराबर विटामिन सी पाया जाता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि यह विदेशी फल किसानों की आमदनी में बड़ा बदलाव ला सकता है. छत, बगीचा या खेत हर जगह इसे उगा सकते हैं.

कानपुर के चंद्रशेखर आज़ाद कृषि विश्वविद्यालय ने बारबडास चेरी की नई प्रजाति को सफलतापूर्वक विकसित कर लिया है. दो साल के लंबे शोध के बाद वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है कि यह विदेशी फल प्रदेश की जलवायु में आसानी से फल-फूल सकता है. विश्वविद्यालय अब इसकी पौध और बीज किसानों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है. बारबडास चेरी शुरू में छोटे आंवले की तरह हरी दिखाई देती है, लेकिन पकने पर इसका रंग चमकीला लाल हो जाता है. वैज्ञानिक बताते हैं कि यह कश्मीर की मीठी चेरी से बिल्कुल भिन्न है. इसके स्वाद में हल्की खटास और मिठास का अनोखा मिश्रण मिलता है, जो इसे और आकर्षक बनाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका पोषण है कि एक चेरी में चार अमरूद के बराबर विटामिन सी होता है, इसी वजह से इसे इम्युनिटी बढ़ाने वाला ‘सुपरफूड’ कहा जाता है.

विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता वी.के. त्रिपाठी ने बताया कि बारबडास चेरी के कुछ पौधों को नर्सरी में प्रयोग के तौर पर लगाया गया था. 2 साल तक उनकी वृद्धि, फूल, फल, और स्थानीय मौसम के अनुरूप ढलने की क्षमता पर अध्ययन किया गया. अब यह पौधे न सिर्फ स्थापित हो चुके हैं, बल्कि उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले फल भी दे रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की मिट्टी और मौसम इस फल के लिए उपयुक्त साबित हुए हैं, इसलिए इसकी वाणिज्यिक खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है.

बारबडास चेरी का पौधा तेज़ी से बढ़ने वाला है और इसकी देखभाल की जरूरत भी नहीं होती. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बड़े खेतों के साथ-साथ घर की छत, किचन गार्डन और छोटे बागानों में भी आसानी से उगाया जा सकता है. यह गर्मी और हल्के पाले दोनों का सामना कर लेता है और साल में दो बार फल देता है, जिससे किसानों को नियमित अतिरिक्त आय मिल सकती है.

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बारबडास चेरी किसानों के लिए एक नया और लाभकारी विकल्प बन सकती है. इसकी मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है और खेती में लागत भी कम आती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इसे व्यापक स्तर पर अपनाया गया, तो यह फल किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है और प्रदेश के फल उत्पादन को नई दिशा दे सकता है.

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