Uttar Pradesh

फरवरी मार्च में इस ककड़ी की खेती करें, गर्मियों में होगी बंपर पैदावार, कम समय में बन जाएंगे मालामाल

ककड़ी की खेती: फरवरी मार्च में करें अगेती खेती, गर्मियों में होगी बंपर पैदावार

कम लागत और अधिक मुनाफे के कारण ककड़ी की खेती छोटे व सीमांत किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन रही है. यह कम जमीन में, कम समय में तैयार होकर गर्मी भर बाजार में अच्छी मांग देती है. फरवरी–मार्च में अगेती खेती के लिए दुर्गापुरी, लखनऊ अर्ली और पंजाब स्पेशल जैसी उन्नत किस्में उपयुक्त हैं. ये 75–90 दिनों में तैयार होकर प्रति हेक्टेयर 150–200 क्विंटल तक पैदावार देती हैं।

आज के दौर में कम लागत और अधिक मुनाफे वाली खेती हर किसान की पहली पसंद बनती जा रही है। खासतौर पर छोटे और सीमांत किसान ऐसी फसलों की तलाश में रहते हैं, जिन्हें कम जमीन, कम खर्च और कम समय में उगाकर अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सके. इन्हीं फसलों में एक है ककड़ी की खेती, जिसे व्यवसायिक फसल के रूप में भी जाना जाता है।

ककड़ी कम जगह में भी आसानी से उगाई जा सकती है और इसकी बाजार में मांग पूरे गर्मी सीजन में बनी रहती है। सलाद और सब्जी के रूप में उपयोग होने के कारण इसकी खपत लगातार रहती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल जाते हैं. अगर किसान ककड़ी की अगेती खेती करना चाहते हैं तो इसकी कुछ उन्नत किस्में हैं, जो कम समय में तैयार हो जाती हैं।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि गर्मियों के दिनों में ककड़ी खीरा व हरी सब्जियों की खेती किसानों के लिए फायदेमंद मानी गई है. ऐसे में कुछ फसलें ऐसी हैं जिसे किसान सीजन के हिसाब से करते हैं तो अधिक लाभ कमा सकते हैं। ऐसी ही एक फसल है ककड़ी जिसकी अगेती खेती फरवरी मार्च में करना चाहते हैं तो इसकी कुछ उन्नत किस्मों की खेती कर सकते हैं।

इन उन्नत किस्मों की खेती से बेहद कम समय में अच्छी पैदावार के साथ बढ़िया मुनाफा ले सकते हैं। दुर्गापुरी ककड़ी एक अच्छी किस्म है, जिसके फल हल्के पीले जिनपर नालीनुमा धारियां होती है. यह किस्म हर जगह आसानी से उगाई जा सकती है. इस किस्म की बुवाई करने के करीब 80 से 90 दिनों बाद तैयार हो जाती है और इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 190 से 200 क्विंटल से अधिक पैदावार ली जा सकती है. इस किस्म में रोग लगने का खतरा कम रहता है।

लखनऊ अर्ली ककड़ी एक और अच्छी किस्म है, जो काफी स्वादिष्ट और मुलायम होती है. इसकी खेती उत्तरी भारत के राज्यों में की जाती है. ककड़ी की लखनऊ अर्ली किस्म मध्य अवधि में तैयार हो जाती है और इसकी बुवाई के करीब 75 से 80 दिन में फसल पक जाती है. किसान इसके फलों की तोड़ाई कर सकते हैं और इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 150 क्विंटल तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

पंजाब स्पेशल ककड़ी एक अच्छी किस्म है, जो उत्तरी भारत के राज्यों के लिए अच्छी मानी जाती है. इसका फल हल्का पीला होता है और इसकी लंबाई 1 फीट से ज्यादा होती है. यह किस्म जल्दी पकने वाली होती है और इससे प्रति हेक्टेयर 200 क्विंटल से अधिक पैदावार ली जा सकती है. अर्का शीतल ककड़ी एक अच्छी किस्म है, जिसके फल हल्की पीली और एक फिट लंबी होती है. यह किस्म बुवाई के करीब 80 से 90 दिन बाद तोड़ाई के लिए तैयार हो जाती है और इसकी खेती से प्रति हेक्टेयर 200 क्विंटल से अधिक पैदावार ली जा सकती है।

जैनपुरी ककड़ी सबसे बेहतरीन किस्म मानी जाती है और इसकी फसल 70 से 80 दिनों में तैयार हो जाती है. इससे प्रति हेक्टेयर 150 से 180 क्विंटल की पैदावार ली जा सकती है. इसका फल सामान्य लंबाई का होता है.

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