Uttar Pradesh

खरपतवार से हैं परेशान और खेतों में बढ़ना है पैदावार, तो अपनाएं मल्चिंग पेपर टेक्निक.. यहां जानिए इसके फायदे और उपयोग।

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां की 55 प्रतिशत आबादी आज भी कृषि कार्यों में ही लगी हुई है. लगातार कृषि के क्षेत्र में तेजी से वैज्ञानिक और आधुनिक सुधार हो रहे हैं इन्हीं सुधारों में खेतों से खरपतवार न होने पाए और इससे पौधे ना प्रभावित होने पाए इसके लिए एक वैज्ञानिक विधि का इस्तेमाल किया जाता है. जिसके तहत खासकर सब्जियों की खेती में मल्चिंग पेपर बिछा दिया जाता है.

मल्चिंग पेपर एक तरह की पॉलिथीन होती है जो खेतों में मेड़ी बनाकर उसके ऊपर चढ़ाई जाती है. यह सब्जियों और फूलों की फसल की सुरक्षा के लिए मल्चिंग पेपर एक शानदार तरीका है क्योंकि यह पेपर खेतों नमी बनाए रखता है और मिट्टी का कटाव होने से रोकता है. मल्चिंग पेपर का सही इस्तेमाल खेतों में पौधों के विकास करने के लिए किया जाता है, क्योंकि इससे अनावश्यक घास और खरपतवार आदि खेतों में नहीं उगने पाती.

कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर सी के त्रिपाठी बताते हैं कि खेती में मल्चिंग शीट लगाते समय उसमें ज्यादा तनाव न डालें, क्योंकि खेती के दौरान तापमान बढ़ने या अन्य काम करने से यह फट सकती है. गर्मियों में इसके फटने की संभावना अधिक होती है. यदि आप मल्चिंग पेपर का उपयोग सुरक्षित रूप से करते हैं और इसे सुरक्षित रखते हैं, तो आप इसे कई बार उपयोग कर सकते हैं.

मल्चिंग पेपर खरपतवारों को नियंत्रित करता है और फसल में पानी के उपयोग को भी कम कर देता है. मल्चिंग पेपर की मदद से फसल की पैदावार भी बढ़ती है. क्योंकि मल्चिंग पेपर बेचने से अनावश्यक खरपतवार और किसी भी प्रकार का अनावश्यक घास नहीं होती जिससे फसल का पौधा पूर्ण रूप से विकसित हो पाता है.

आप भी सब्जियों और फलों की खेती करने की सोच रहे हैं और यह चाहते हैं कि आपके द्वारा लगाए गए पौधे खरपतवार से सुरक्षित रहें तो इसके लिए आपको मल्चिंग पेपर का उपयोग करना चाहिए. एक बंडल मल्चिंग पेपर की कीमत ₹1300 होती है. और इतने रुपए में यह 400 फीट तक बिछाई जा सकती है यानी की यदि आप सब्जियों और फलों की खेती कर रहे हैं तो यह आपके लिए खरपतवार से लड़ने और खेतों में नमी बनाए रखने का एक बेहतर और सस्ता उपाय है.

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