Uttar Pradesh

खीरी में हाई रिस्क ज़ोन चिन्हित, सड़क हादसों पर लगाई जाएगी रोक, जानिए सारी डिटेल्स

लखीमपुर खीरी. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को देखते हुए अब प्रशासन ने जिले के 15 हाई-रिस्क स्थानों की पहचान की है. इन स्थानों को हाई रिस्क कॉरिडोर, हाई डेंसिटी कॉरिडोर और क्रिटिकल जंक्शन का नाम दिया गया है, जहां पिछले 3 साल में सबसे अधिक सड़क हादसे और यातायात नियमों का उल्लंघन दर्ज हुआ है. अब इन स्थानों पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाए जाएंगे, ताकि सड़क हादसों को रोका जा सके और यातायात सुरक्षित बनाया जा सके.

खीरी जनपद उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है, ऐसे में यहां सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है. हादसों के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिले की प्रशासनिक टीम ने अब सड़क सुरक्षा और हादसों पर रोक लगाने की तैयारी पूरी कर ली है, ताकि आम लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

सख्त कार्रवाई होगीखीरी जिले में हाई रिस्क कॉरिडोर के तहत एक किलोमीटर लंबाई वाले उन स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां पिछले तीन वर्षों में कम से कम तीन सड़क हादसे हुए हों. इसके अलावा, उन सड़कों को भी चिन्हित किया जाएगा, जहां तीन साल में दो हादसे हुए हों. खास तौर पर स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 100 मीटर क्षेत्र की सड़कों को भी शामिल किया गया है, ताकि पैदल यात्रियों, छात्रों, दोपहिया चालकों और साइकिल सवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. प्रशासन ने यह भी कहा है कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी और हादसों के बाद भागने वाले चालकों की पहचान कर उन पर तुरंत कार्रवाई करना आसान होगा.

क्या है आधुनिक डिवाइसखीरी जिले के हाई-रिस्क स्थानों पर लगाए जाने वाले आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में कई उन्नत तकनीकें शामिल हैं. इसमें ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरा, स्पीड डिटेक्शन कैमरा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रैफिक वायलेशन डिटेक्शन सिस्टम, रेड लाइट वायलेशन डिटेक्टर, डिजिटल साइनेज, डैशबोर्ड और सीसीटीवी कैमरा शामिल होंगे. इन डिवाइसों से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि ट्रैफिक अनुशासन भी बेहतर होगा. हादसे के बाद वाहन लेकर भाग जाने वाले चालकों की पहचान अब आसानी से हो सकेगी, जिससे विवादों का निपटारा भी सरल होगा. इसके अलावा, ओवरस्पीडिंग, बिना नंबर प्लेट वाहन और अन्य ट्रैफिक उल्लंघनों पर भी नजर रखी जाएगी, जिससे सड़क सुरक्षा और नियंत्रण दोनों मजबूत होंगे.

जिले की पांच हाई रिस्क एरियाखीरी जिले में सड़क सुरक्षा की दृष्टि से हाई रिस्क श्रेणी में कई स्थानों को चिन्हित किया गया है. धौरहरा के सिसैया चौराहे और आसपास एक किलोमीटर के दायरे को हाई रिस्क जोन में रखा गया है, जहां पिछले तीन वर्षों में 9 सड़क हादसे हुए, जिनमें चार लोगों की मौत हुई. सदर कोतवाली क्षेत्र के पंडित दीनदयाल चौराहे पर भी एक किलोमीटर के दायरे में तीन साल में सात हादसे और तीन लोगों की मौत दर्ज हुई. मोहम्मदी के गोमती मोड़ पर 10 हादसों में छह लोगों की मौत हुई, वहीं सदर कोतवाली के लालपुर बैरियर तिराहा पर चार हादसों में दो लोगों की जान गई. फरधान के मनिका तिराहा पर 15 हादसों में आठ लोगों की मौत हुई. ये सभी स्थान अब हाई रिस्क श्रेणी में शामिल रहेंगे और यहां सड़क सुरक्षा के आधुनिक उपाय लागू किए जाएंगे.

जिले के सात डेंसिटी एरियाखीरी जिले के लखीमपुर शहर के एलआरपी चौराहे पर तीन वर्ष में 9 सड़क हादसे में चार की मौत हुई, संकटा देवी चौराहा, मेला मैदान चौहरा, नौरंगाबाद चौराहा, विकास चौराहा गोला, कमल चौराहा पलिया में हादसे नहीं हुए परन्तु सबसे अधिक यातायात नियमों का उल्लंघन किया गया, ऐसे में इन स्थानों को हाई डेंसिटी के रूप में चुना गया है.

जिले के चार क्रिटिकल जंक्शनमहेवागंज तिराहा व उसके एक किलोमीटर दायरे में तीन वर्ष में पांच हादसों में पांच की मौत, राजापुर चौराहे पर चार हादसों में तीन की मौत, सुन्सी मोड़ ओयल में हुए पांच हादसों में चार की मौत, छाउछ चौराहा पर पांच हादसों में चार की मौत हुई है. इसलिए इन्हें क्रिटिकल जंक्शन नाम दिया गया है.जिसको लेकर न्यूज़ 18 लोकल से बातचीत करते हुए एआरटीओ शांति भूषण पांडे ने बातचीत करते हुए बताया कि यातायात नियमों का उल्लंघन व सड़क हादसे को रोकने के लिए जिले के 15 स्थानों को चिन्हित कर शासन को रिपोर्ट भेजी गई है. जल्द से जल्द कैमरे और आधुनिक डिवाइस लगाई जाएगी शासन की यह एक अच्छी पहल है.

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